साल 2004 के ओलंपिक गेम्स की वो तस्वीरें आपको जरूर याद होंगी, जब राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने देश के लिए सिल्वर पदक जीता था, पदक जीतने वाले राज्यवर्धन रातोंरात देश के हीरो बने गए थे...देखिए उनका इंटरव्यू
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कोमल नेगी
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Hidden Gem Treks of Kedar Himalaya You Must Explore Once in Life
Peaceful and untouched trekking routes away from the crowds. Hidden trails where nature still remains raw and pure.
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Image: Rajyavardhan singh rathore reached Dehradun
: सबसे पहले इस शानदार साक्षात्कार के लिए RJ काव्य (कविन्द्र सिंह) को साधुवाद...खुशकिस्मत होते हैं वो लोग जो देश की सेवा में अपना योगदान देते हैं, और इनमें भी ऐसे लोग विरले ही होते हैं जिन्हें अलग-अलग रूप में देश की सेवा करने का मौका मिलता है। रिटायर्ड कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ भी इनमें से एक हैं। जिन्होंने पहले सेना में रहकर देश की सेवा की, 2004 के ओलंपिक खेलों में देश के लिए डबल ट्रैप इवेंट में रजत पदक जीता, भारतीय निशानेबाजों को पूरी दुनिया में पहचान दिलाई। सेना से रिटायर होने के बाद राजनीति में आए और केंद्रीय मंत्री के तौर पर युवाओं और देश के कल्याण के लिए काम किया। शुक्रवार को राज्यवर्धन सिंह राठौड़ देहरादून में थे, इस दौरान उन्होंने आरजे काव्य यानी कविन्द्र सिंह से अपनी जर्नी और देहरादून को लेकर कई यादें शेयर की। उन्होंने कहा कि 30 साल पहले मैं देहरादून आईएमए में था। पासआउट हुआ तो पलटन देहरादून में थी। उस वक्त सड़कें पतली थीं, अब देहरादून बदल गया है, लेकिन दून का आत्मा आज भी सिंपल है। यहां की खूबसूरती बरकरार रहनी चाहिए। राज्यवर्धन कहते हैं कि जब हम आईएमए से पास आउट हुए तो लगा कि सारी मुश्किलें हल हो गईं, पर असल में ये एक जिम्मेदारी की शुरुआत होती है। आईएमए की ट्रेनिंग हमें जीवन का आधार देती है, हमें जीवनभर के लिए मजबूत बनाती है। एनडीए और आईएमए के दिनों की बहुत याद आती है। आगे देखिए पूरा इंटरव्यू
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पूर्व केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ का उत्तराखंड से लगाव तो है ही, अटूट रिश्ता भी है। दरअसल उनका ससुराल उत्तराखंड के अल्मोड़ा में स्थित है। जहां वो अक्सर अपने परिवार के साथ आते-जाते रहते हैं। वो कहते हैं कि उत्तराखंड ने हर क्षेत्र में तरक्की की है, फिर चाहे वो साहित्य हो या फिर खेल...यहां हर घर में, हर परिवार में एक फौजी है। लोगों के सरल स्वभाव के चलते इसे देवभूमि कहा जाता है। यहां की सुंदरता कायम रहनी चाहिए और ये जिम्मेदारी हम सबकी है। रेवेन्यू जनरेट करने के लिए यहां कई संसाधन हैं, पहाड़ों में इंडस्ट्रीज लग सकती हैं, मिनरल रिसोर्सेज हैं, लेकिन कंस्ट्रक्शन बेतरतीब नहीं होना चाहिए। एडवेंचर और स्पोर्ट्स टूरिज्म भी यहां पर रोजगार का बेहतर जरिया बन सकता है। आरजे काव्य से मुलाकात के दौरान राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने अपने बीते दिनों से लेकर पैरेंटिंग जैसे मुद्दों पर भी खुलकर बात की, चलिए अब आपको राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के इंटरव्यू का वो वीडियो दिखाते हैं, जिसे आरजे काव्य ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया है, ये बहुत मोटिवेशनल है, और उम्मीद है इससे आप भी इससे कुछ ना कुछ जरूर सीखेंगे...देखें वीडियो...