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अल्मोड़ा: राजनीति की तरफ हमारा ज्यादा रुख नहीं रहता लेकिन कुछ बातें हैं, जो अनायास ही अपनी तरप खींच ले आती हैं। खासतौर पर वो पहाड़ की बातें हों या पहाड़ के लोगों से जुड़ी बातें। इन बातों को लिखना और आप तक पहुंचाना हमें अच्छा लगता है। आज मोहन सिंह बिष्ट की बात इसलिए क्योंकि वो दिल्ली के चुनावी मैदान में 5वीं बार विधायक बने हैं। आप में से कितने लोग जानते हैं कि मोहन सिंह बिष्ट उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के अजोली गांव के रहने वाले हैं। 2जून 1957 को कौशल सिंह बिष्ट और हीरा देवी के घर जन्मे मोहन सिंह बिष्ट को राजनीति का चस्का कैसे लगा, ये जानकर आप मुस्कुराएंगे भी और हैरानी भी होगी। जब मोहन छोटे थे तो चुनाव के वक्त स्थानीय नेता गांव में वोट मांगने आते थे। बालमन में न जाने क्या हुआ कि बस ये ही बात छोटे से मोहन को जम गई। बताया जाता है कि करीब 20 साल की उम्र में मोहन दिल्ली चले आए और भारतीय जनता पार्टी जॉइन कर ली। तब से लेकर अब तक वो बीजेपी के मजबूत सिपाही हैं। 1998 से लेकर 2013 तक मोहन सिंह बिष्ट दिल्ली की करावल नगर विधानसभा सीट से लगातार जीतते रहे। चाहे वो परिसीमन से पहले की बात हो, या फिर परिसीमन के बाद...मोहन सिंह बिष्ट के लिए बुजुर्गों से लेकर युवाओं के दिल में अलग ही जगह बनी। साल 2015 में अचानक कुछ बदल गया। आम आदमी पार्टी के कपिल मिश्रा ने करावल नगर सीट से जीत हासिल कर दी लेकिन वक्त का खेल देखिए। कुछ वक्त बाद ही कपिल मिश्रा ने बीजेपी जॉइन कर दी। पासा एक बार फिर से मोहन सिंह बिष्ट के पाले में था। एक बार फिर से मोहन सिंह बिष्ट एक्टिव हुए और इस बार रिकॉर्ड 5वीं बार वो दिल्ली की करावल नगर विधानसभा सीट से विजयी साबित हुए। वो सिर्फ विजयी साबित नहीं हुए बल्कि दिल्ली में बीजेपी का एक मजबूत सिपाही भी साबित हुए हैं। बीजेपी की ओर से मोहन सिंह बिष्ट ने शानदार प्रदर्शन किया और आम आदमी पार्टी (AAP) के दुर्गेश पाठक को 8223 मतों के अंतर से हरा दिया। मोहन सिंह बिष्ट को 96721 मत हासिल हुए तो दुर्गेश को 88498 वोट मिले. कांग्रेस के अरबिंद सिंह तीसरे स्थान पर रहे।
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