उत्तराखंड: 3 दिन, 6 अस्पताल और फिर भी नहीं बची गर्भवती की जान.. जुड़वा बच्चों ने भी तोड़ा दम

उत्तराखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। इनोलू गांव की 24 वर्षीय गर्भवती निशा को परिजन तीन दिन में रामनगर, हल्द्वानी और काशीपुर के छह अस्पतालों तक ले गए, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी।
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Uttarakhand Health System: Pregnant Woman Dies After Visiting 6 Hospitals in 3 Days
Image: Pregnant Woman Dies After Visiting 6 Hospitals in 3 Days

अल्मोड़ा: उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने वाला दर्दनाक मामला सामने आया है। इनोलू गांव की 24 वर्षीय गर्भवती निशा को बचाने के लिए परिवार तीन दिनों तक रामनगर, हल्द्वानी और काशीपुर के छह अस्पतालों के चक्कर काटता रहा। आखिरकार काशीपुर के निजी अस्पताल में निशा की मौत हो गई। वह जुड़वा बच्चों से गर्भवती थी, जिनमें से एक की पहले ही मौत हो चुकी थी, जबकि दूसरे ने भी कुछ घंटे बाद दम तोड़ दिया।

Pregnant Woman Dies After Visiting 6 Hospitals in 3 Days

परिजनों के मुताबिक, 30 अगस्त की रात निशा को अचानक घुटन महसूस हुई। कुछ देर बाद उसकी तबीयत में सुधार हुआ तो परिवार ने इसे सामान्य परेशानी समझा। हालांकि, अगले दिन यानी 31 अगस्त की सुबह सांस लेने में परेशानी बढ़ गई। इसके बाद परिजन उसे रामनगर के रामदत्त जोशी राजकीय चिकित्सालय लेकर पहुंचे। वहां निशा की हालत को जटिल बताते हुए परिजनों को उसे हल्द्वानी ले जाने की सलाह दी गई।

हल्द्वानी के अस्पताल पहुंची निशा

इसके बाद परिजन निशा को हल्द्वानी स्थित सुशीला तिवारी राजकीय अस्पताल लेकर पहुंचे। परिजनों के अनुसार, वहां निजी अस्पताल में उसका अल्ट्रासाउंड कराया गया। जांच के बाद उसकी हालत ठीक बताई गई और उसे घर ले जाने की सलाह दी गई। इसके बाद परिजन निशा को एक रिश्तेदार के घर ले गए।

एक सितंबर की रात फिर बिगड़ी हालत

एक सितंबर की रात करीब नौ बजे निशा की तबीयत दोबारा बिगड़ गई। उसे सांस लेने में काफी परेशानी होने लगी। परिजन उसे फिर सुशीला तिवारी अस्पताल लेकर पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि उसकी स्थिति गंभीर और केस जटिल बताते हुए उसे अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया और आगे के उपचार के लिए रेफर कर दिया गया। इसके बाद परिवार निशा को एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचा, लेकिन वहां भी उपचार नहीं हो सका। हालत लगातार बिगड़ने पर परिजन उसे काशीपुर ले गए। आगे पढ़िए..

काशीपुर में तीन अस्पतालों के चक्कर

निशा को काशीपुर पहुंचाने के बाद भी परिवार की परेशानी खत्म नहीं हुई। यहां भी परिजनों को तीन अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़े। इस दौरान निशा की हालत लगातार गंभीर होती चली गई। परिवार लगातार इलाज की उम्मीद में अस्पतालों के बीच भटकता रहा।

ऑपरेशन थिएटर ले जाते समय आए दो अटैक

परिजनों के मुताबिक, 2 सितंबर की सुबह करीब 10 बजे निशा को ऑपरेशन थिएटर ले जाया जा रहा था। इसी दौरान उसे लगातार दो अटैक आए और उसकी मौत हो गई। निशा की मौत के बाद चिकित्सकों ने ऑपरेशन कर उसके गर्भ से दोनों जुड़वा बच्चों को बाहर निकाला। परिजनों के अनुसार, एक बच्चा पहले ही मृत था, जबकि दूसरे बच्चे ने भी जन्म के कुछ घंटे बाद दम तोड़ दिया।

एक साल पहले हुई थी निशा की शादी

निशा की शादी करीब एक साल पहले मनोज से हुई थी। परिजनों के मुताबिक, परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। एक साथ मां और दोनों नवजात बच्चों की मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।

छह अस्पतालों के चक्कर के बाद भी नहीं बच सकी जान

निशा के परिवार के मुताबिक, तीन दिनों के दौरान उसे रामनगर, हल्द्वानी और काशीपुर के छह अस्पतालों तक ले जाया गया। परिवार का आरोप है कि अलग-अलग जगहों पर इलाज और भर्ती को लेकर उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ा। यह घटना अब केवल एक परिवार की त्रासदी तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसने पहाड़ी और आसपास के क्षेत्रों में गंभीर मरीजों तथा गर्भवती महिलाओं के लिए उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
हालांकि, अस्पतालों की ओर से इलाज में कथित लापरवाही के आरोपों पर आधिकारिक जांच या विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है। मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि निशा को समय पर उपचार क्यों नहीं मिल पाया और इलाज की प्रक्रिया में कहीं लापरवाही हुई या नहीं। तीन दिन तक इलाज की तलाश में भटकने के बाद एक गर्भवती महिला और उसके दोनों बच्चों की मौत की यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।