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ऋषियों का मार्ग: केदार हिमालय के इन ट्रेक्स पर शोर नहीं, सिर्फ मंत्र सुनाई देते हैं
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
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टिहरी गढ़वाल: देवभूमि की बेटियों ने हमेशा पहाड़ों का नाम रौशन किया है। वो बेटियां जिनके लिए देश की सेवा करने से अधिक जरूरी और कुछ भी नहीं है। ऐसे फाइटर्स को दिल से सलाम, जो पारिवारिक ज़िम्मेदारियों की परवाह न करते हुए देश की सेवा करने के लिए सदैव तैयार रहती हैं। देवभूमि की ऐसी ही बेटी के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं जो पेशे से डॉक्टर हैं। देहरादून निवासी डॉ. अंकिता 31 मार्च तक मातृत्व अवकाश पर थीं। आठ माह के छोटे से बच्चे को इस उम्र में मां के देखभाल की सख्त जरूरत होती है। उनके अवकाश के दिनों में ही कोरोना ने भारत में असर दिखाना शुरू कर दिया था और तेजी से फैल रहा था। जैसे ही अंकिता को कोरोना से देश मे होने वाली समस्याओं के बारे में पता लगा तो अंकिता ने सन्तान मोह को परे रखा। देश पर आई मुसीबतों से लड़ने के लिए, लोगों की जान बचाने के लिए डॉ. अंकिता तैयार हो गई। पहाड़ की एक जिम्मेदार डॉक्टर होने के नाते अवकाश समाप्त होने से पहले ही अंकिता 15 मार्च को अपने 8 माह के बच्चे को छोड़कर लोगों की सेवा करने के सिए वापस लौट आईं।