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ये ट्रेक्स गूगल मैप पर भी नहीं मिलेंगे! केदार हिमालय के छुपे हुए रास्ते
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
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टिहरी गढ़वाल: अपने जीते जी संतान को खो देना माता-पिता के जीवन का सबसे बड़ा दुख होता है। टिहरी गढ़वाल का रहने वाला एक परिवार इस वक्त इसी दुख और पीड़ा से गुजर रहा है। दुबई में हार्ट अटैक से मरने वाले 25 साल के कमलेश भट्ट को आज परिजनों ने अंतिम विदाई दी। ऋषिकेश के पूर्णानंद घाट पर कमलेश का अंतिम संस्कार हुआ। कमलेश भट्ट अपने परिवार की जिंदगी संवारने के लिए विदेश गया था, पर किसे पता था कि अब वो जिंदा वापस नहीं लौटेगा। भला 25 साल भी कोई उम्र होती है दुनिया छोड़ने की। यही नहीं कमलेश के परिवारवालों को दोहरे दुख का सामना करना पड़ रहा था। परदेस में बेटे की मौत का दुख तो था ही, भारत से शव को दोबारा दुबई लौटा दिया गया था। परिजनों को लगा कि अब वो लाल के अंतिम दर्शन भी नहीं कर पाएंगे, पर भला हो समाजसेवी रोशन रतूड़ी का। जिनकी कोशिशों की बदौलत कमलेश भट्ट का पार्थिव शरीर किसी तरह दोबारा भारत लाया जा सका।