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ये ट्रेक्स गूगल मैप पर भी नहीं मिलेंगे! केदार हिमालय के छुपे हुए रास्ते
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
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अल्मोड़ा: प्रवासियों के आने से गांव की चहल-पहल लौट आई है। खासकर की युवाओं के पहाड़ों पर लौटने से गांव में एक उम्मीद की किरण भी लौट कर आई है। पहाड़ों की तकदीर और उसकी तस्वीर अगर कोई बदल सकता है तो वो है पहाड़ का युवा। लॉकडाउन में गांव की रौनक वापस आने के साथ ही अल्मोड़ा के कुछ युवाओं ने गांव में 18 दिन के भीतर सड़क बना कर हिम्मत और लगन का उदाहरण समाज के आगे पेश किया है। बता दें कि खौड़ी गांव स्थित सणोली तक सात किलोमीटर लंबी सड़क है मगर वहां से गुरना गांव तक तकरीबन 1 किलोमीटर पैदल जाना होता है जिसका रास्ता बेहद संकरा था। हालात तो इतने खराब थे कि बीमार व्यक्ति को अस्पताल ले जाने में भी बेहद कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। ग्रामीण लंबे समय से इस संकरी सड़क के कारण उत्पन्न हो रही समस्याओं से ग्रस्त थे। ऐसे में जब द्वारसौं गांव के युवा लॉकडाउन के कारण वापस आए तो उन्होंने गांववालों की परेशानी को करीब से महसूस किया। आगे पढ़िए