पहाड़ का अमृत...कोरोना के दौर में इम्युनिटी बढ़ाने वाला कुदरती फल..जानिए इसके फायदे

उत्तराखंड की भूमि केवल सौंदर्यता के लिए नहीं जानी जाती है अपितु यहां ऐसे-ऐसे पेड़-पौधे, फल-सब्जियां लगती हैं जो स्वाद में तो लाजवाब होती ही हैं वहीं गुणों में भी कम नहीं होते। ऐसे ही फल के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं-
Advertisement Hidden Gem Treks of Kedar Himalaya You Must Explore Once in Life

Peaceful and untouched trekking routes away from the crowds. Hidden trails where nature still remains raw and pure.

Example Ads Media
Uttarakhand Hisar: Benefits of hisar husul of uttarakhand
Image: Benefits of hisar husul of uttarakhand

अल्मोड़ा: राज्य समीक्षा समय-समय पर आपको उत्तराखंड में उगने वाले ऐसे औषधीय गुणों से भरपूर पेड़-पौधों और फलों के बारे में जानकारी देता रहता है। ऐसा ही एक फल है जो स्वाद में गजब का स्वादिष्ट है और इसके फायदे अगर आप जान लेंगे तो हैरान रह जाएंगे। हम बात कर रहे हैं पहाड़ों पर उगने वाले फल हिसर, हिसूल, हिसालू की। हिसालू मुख्य रूप से रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, टिहरी, पौड़ी, अल्मोड़ा, बागेश्वर, चंपावत और पिथौरागढ़ के अनेक स्थानों में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। स्थानीय लोगों द्वारा इसका खूब सेवन किया जाता है। हिसालू को हिमालयन रेसबेरी भी कहा जाता है। हिसालू दो प्रकार के होते हैं, एक पीला और एक काला। मई-जून में लगने वाला और स्वाद में खट्टा-मीठा हिसालू इतना कोमल होता है कि पकड़ते ही टूट जाता है, जीभ में रखो तो फिसल जाता है। इसके फलों को तोड़ने के 1-2 घंटे के भीतर खा लेना चाहिए नहीं तो यह खराब हो जाता है। चलिए अब आपको बताते हैं कि टेस्ट के साथ-साथ हेल्थ के लिए भी पहाड़ों का हिसालू कितना महत्वपूर्ण है। आगे पढ़िए

यह भी पढ़ें - देवभूमि का अमृत...10 से ज्यादा बीमारियों की अचूक दवा है काफल, जानिए इसके फायदे
हिसर से आप इम्यूनिटी पावर बढ़ा सकते हैं। हिसालू के अंदर एन्टी ऑक्सीडेंट प्रचूर मात्रा में पाए जाते हैं। एंटी ऑक्सीडेंट हमारे शरीर के लिए काफी लाभदायक हैं। साथ ही इसकी ताजी जड़ के रस का उपयोग करने से पेट की सभी बीमारियां दूर हो जाती हैं। केवल इतना ही नहीं बल्कि इसके फलों से प्राप्त जूस का प्रयोग खांसी, गले का दर्द, बुखार इत्यादि में कारागार होता है। किडनी टॉनिक के रूप में भी हिसालू का सेवन किया जाता है। यहां तक कि हिसालू की पत्तियां भी काफी काम की हैं। इसकी पत्तियों की ताजी कोपलों को ब्राह्मी की पत्तियों के साथ मिला कर पेप्टिक अल्सर भी जड़ से ठीक हो जाता है। साथ ही साथ हिसालू के फलों से प्राप्त एक्सट्रेक्ट के अंदर डायबिटीज या मधुमेह जैसी बीमारी को ठीक करने के गुण देखे गए हैं। इतने सारे औषधीय गुणों से भरा है उत्तराखंड का हिसालू। यह बेहद कॉमन से फल हैं जो आसानी से बाजार में उपलब्ध हो जाएगा। आप भी हिसालू को अपने खान-पान में सम्मलित करें और अपनी एवं अपने परिवार वालों के स्वास्थ्य का ध्यान रखें।