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90% ट्रेकर्स नहीं जानते केदार हिमालय के ये सीक्रेट रूट्स
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
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हल्द्वानी: उत्तराखंड ने एक बार फिर एक सपूत खो दिया...आंखें नम हैं लेकिन दिल गर्व से भरा है। नैनीताल के हल्द्वानी के गोरा पड़ाव के निवासी सूबेदार यमुना प्रसाद अब हमारे बीच नहीं रहे। वो ना सिर्फ एक जांबाज सूबेदार थे बल्कि बेमिसाल पर्वतारोही भी थे। जी हां यमुना प्रसाद 2002 में सेना में भर्ती हुए थे। इसके बाद से वो सेना के साहसिक कार्यक्रमों का हिस्सा रहे। साल 2012 में वो दौर भी आया जब यमुना प्रसाद ने साबित किया कि वो एक जबरदस्त पर्वतारोही भी हैं। 2012 में उन्होंने माउंट एवरेस्ट चोटी को फतह करने का रिकॉर्ड अपने नाम किया था। इसके लिए उन्हेंं उनकी टीम के साथ सम्मानित भी किया गया था। वो ऑन ड्यूटी कई अवॉर्ड भी अपने नाम कर चुके थे। शहीद यमुना प्रसाद अपने पीछे बेटे 7 साल के बेटे यश और 5 साल की बेटी साक्षी को छोड़ गए।