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रुद्रप्रयाग: हरे-भरे पहाड़ आखिर किसको पसंद नहीं? सब जानते है कि प्रकृति की वजह से ही हम जिंदा हैं। मगर जरा और करीब से हम पहाड़ों और प्रकृति को देखेंगे तो हमें मनुष्यों की विफलता मिलेगी। वो इसलिए क्योंकि हमने पर्यावरण को हमेशा खुद के अधीन माना है। जब हम अपने ही पहाड़ों को, प्रकृति को जाने अंजाने में गंदा करते हैं तो इसका दोष हम सरकार और सिस्टम को आखिर कब तक देते रहेंगे। साफ बात तो ये है कि न कोई सरकार और न कोई सिस्टम बल्कि प्रकृति के विनाश का कारण हम खुद हैं। हां...कुछ लोग हैं, जो जरा हटकर हैं। आज हम आपको रुद्रप्रयाग के कुछ ऐसे ही लोगों के बारे में बताने जा रहे हैं। पांडवाज़ के कुणाल डोभाल और सलिल डोभाल ने अपने पिता प्रेम मोहन डोभाल के साथ ये मुहिम शुरू की। रुद्रप्रयाग का तूना-बौठा मार्ग बेहद खूबसूरत है लेकिन इंसानी गलतियों की वजह से इस मार्ग पर कहीं शराब की बोतलें, कहीं कूड़ा, कहीं रैपर कहीं डिस्पोजे़बल की भरमार थी। आखिरकार पांडवाज की मुहिम में लोग जुड़े और तब जाकर एक अच्छा काम अपने अंजाम तक पहुंचा। अपने आसपास के इलाकों में फैली गंदगी को देखने के बाद इन्होंने ये फैसला लिया कि वो खुद के दम पर सफाई करेंगे। उन्होंने सिस्टम को दोष नहीं दिया, न ही सरकार को कोसा, बल्कि उन्होंने खुद के बलबूते पर रुद्रप्रयाग के तूना-बौंठा मार्ग पर 3 किलोमीटर के अंदर के दायरे में सफाई की। आगे देखिए तस्वीरें