Advertisement
केदार हिमालय के ऐसे ट्रेक जहां रास्ता खुद आपको चुनता है
बुग्याल, हिमालयी वन और बर्फीली चोटियों का अद्भुत नज़ारा। आध्यात्म, रोमांच और एकांत का अनोखा संगम।
Example Ads Media
देहरादून: लद्दाख के गलवान घाटी में बीते 15 जून को भारत और चाइना के बीच हिंसक झड़प हो गई जिसमें दुर्भाग्यवश भारत ने अपने 20 जवानों को हमेशा-हमेशा के लिए खो दिया। 50 सालों के इतिहास में बीते 15 जून को जो मुठभेड़ हुई वह सबसे खतरनाक और हिंसात्मक झड़प थी। इससे देश के लोगों के बीच आक्रोश साफ झलक रहा है। उन शहीदों में से एक थे कांकेर के जवान गणेश कुंजाम। उनकी शहादत के बाद से ही उनके गांव और घर में मातम पसरा हुआ है। उनकी महीने भर पहले ही बॉर्डर पर पोस्टिंग हुई थी और मुठभेड़ के दौरान वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। शून्य से भी नीचे तापमान में वह चीन के सिपाहियों से अंत तक लड़े और अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। शहीद गणेश कुंजाम कुरुटोला गांव से नाता रखते थे। उनका परिवार बेहद गरीब है और वह अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। शहीद के चाचा कहते हैं कि आखिरी बार एक महीने पहले गणेश से बात हुई थी। आगे पढ़िए