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Secret Himalayan Treks Near Kedarnath You’ve Never Heard Of
Trails once used by sages, locals, and shepherds. Ideal for travelers seeking silence over social media fame.
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टिहरी गढ़वाल: कोरोना....इस शब्द के आसपास हमारी पूरी दुनिया सिमट कर रह गई है। या यूं कहें कि कोरोना ने जिंदगी की रफ्तार को बिल्कुल थाम सा दिया हो। खौफ के साथ ही बेरोजगारी को भी अपने साथ लाई है यह वैश्विक महामारी। उत्तराखंड में कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन में सैकड़ों युवाओं ने अपनी नौकरी गंवा दी है। कई युवाओं ने अपनी नौकरी खो देने के बाद गांव की ओर रुख किया है। वे गांव की ओर वापस तो आ गए हैं मगर उनके पास इस समय रोजगार का कोई विकल्प नहीं है। उनके सामने रोजी-रोटी का एक बड़ा संकट खड़ा हो चुका है। मगर कई युवा ऐसे हैं जो हाथ पर हाथ धरे ना बैठ कर कर्म करने में विश्वास रखते हैं। उपलब्ध साधनों के साथ ही स्वरोजगार के पथ पर आगे बढ़ रहे हैं और साथ ही साथ लोगों को प्रोत्साहन भी दे रहे हैं। आज हम टिहरी गढ़वाल के एक ऐसे ही युवा के बारे में आपको बताने जा रहे हैं जो दौरान अपनी नौकरी से हाथ धो बैठा और वापस अपने गांव की ओर आ गया। गांव आकर उसने स्वरोजगार के पथ पर चलने का निर्णय लिया और अनोखी मिसाल पेश की। हम बात कर रहे हैं थौलदार ब्लॉक के तिवार गांव के आशीष डंगवाल की।