जिला अस्पताल में महिला का सफल ऑपरेशन कर उसके पेट से 8 किलो का ट्यूमर निकाला गया। इस ऑपरेशन को अस्पताल के सीएमएस एवं सर्जन डॉ. एसडी सकलानी ने अंजाम दिया है।
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Komal Negi
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Image: Uttarkashi doctor Saklani treated the tumor
उत्तरकाशी: पेट में 8 किलोग्राम वजन के ट्यूमर से दिन-रात बेचैन रहने वाली उत्तरकाशी की महिला को जिले के डॉक्टरों ने संजीवनी दी है। जिला अस्पताल में महिला का सफल ऑपरेशन किया गया। ट्यूमर की वजह से महिला की जिंदगी दुश्वार हो गई थी। उसे कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं से जूझना पड़ रहा था। परिजन उसे गंभीर हालत में जिला अस्पताल लेकर आए। जहां सीएमएस एवं सर्जन डॉ. एसडी सकलानी ने सफल ऑपरेशन कर महिला के पेट से 8 किलो का ट्यूमर निकाला। बीते शुक्रवार को डुंडा तहसील के मूसड गांव में रहने वाली 45 साल की जमुना देवी को परिजन गंभीर हालत में अस्पताल लेकर आए थे। जमुना देवी को पेट में दर्द की शिकायत थी। महिला की हालत देख उसे अस्पताल में भर्ती किया गया। आगे भी पढ़िए
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इसके बाद जिला अस्पताल के सीएमएस एवं सर्जन डॉ. एसडी सकलानी की निगरानी में महिला का इलाज शुरू हुआ। इसके बाद महिला का सिटी स्कैन समेत अन्य मेडिकल जांचें कराई गई। जिसमें महिला के पेट में ट्यूमर होने की बात सामने आई। महिला का तुरंत ऑपरेशन किया जाना था। मेडिकल जांच के बाद महिला के पेट में ट्यूमर के ऑपरेशन के लिए परिजनों की अनुमति ली गई। अस्पताल के डॉक्टरों की निगरानी में महिला का सफल ऑपरेशन कर उसके पेट से 8 किलो का ट्यूमर निकाला गया। इस ऑपरेशन को सीएमएस एवं सर्जन डॉ. एसडी सकलानी ने अंजाम दिया है। सर्जन डॉ. एसडी सकलानी ने बताया कि महिला के पेट में 8 किलो का ट्यूमर था। जिसे मेडिकल साइंस में पोस्टीरियर सर्वाइकल फाइब्रॉयड कहा जाता है।
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इस बीमारी के कारण महिला का पेट लगातार फूल रहा था और उसे अन्य समस्याओं से भी जूझना पड़ा रहा था। डॉ. एसडी सकलानी ने बताया कि ट्यूमर की वजह से महिला को यूरिन संबंधी समस्या आ रही थी। हार्मोंस का संतुलन सही ना होने की वजह से शरीर में ट्यूमर होता है। महिला के पेट में जो ट्यूमर था, उससे यूरिन की नली दब रही थी। शरीर के दूसरे अंगों पर भी दबाव पड़ रहा था। ऑपरेशन के बाद महिला की हालत ठीक है। मरीज को डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। जिला अस्पताल के डॉक्टरों की कोशिश से पहाड़ की महिला को जीवनदान मिला है। महिला के सफल ऑपरेशन के बाद परिजनों ने डॉ. सकलानी का आभार जताया। ये जानकर अच्छा लगता है कि पहाड़ में ऐसे डॉक्टर भी हैं, जो लगन से काम कर रहे हैं और इनकी बदौलत मरीजों को मंगहे इलाज के लिए शहर की तरफ नहीं भागना पड़ता।