जौलजीबी और मुनस्यारी सेक्टर को जोड़ने वाला ये ब्रिज सेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसके बनने से भारत-चीन सीमा तक जाने वाले सेना के वाहनों की राह आसान बनेगी, लोगों को भी राहत मिलेगी।
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Komal Negi
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Image: Bailey Bridge on Pithoragarh India-China border ready
पिथौरागढ़: उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों में सीमा सड़क संगठन आम लोगों और सेना की राह आसान बनाने के अभियान में जुटा है। बीआरओ ने पिथौरागढ़ जिले में चीन सीमा के पास 180 फुट लंबा बेली पुल बनाया है। इस पुल के बनने से पिथौरागढ़ के निवासियों को बड़ी राहत मिलेगी, साथ ही चीन सीमा तक भारतीय सेना की राह आसान हो जाएगी। पिथौरागढ़ में इस वक्त किस तरह के हालात हैं, ये तो आप जानते ही हैं। मानसूनी बारिश यहां कहर बरपा रही है। हर तरफ आपदा जैसे हालात बने हुए हैं। पुल-सड़कें भूस्खलन की भेंट चढ़ गईं। पिथौरागढ़ जिला पिछले कई दिनों से अलग-थलग पड़ा था। अब बीआरओ की मेहनत के चलते यहां संचार सेवाएं बेहतर होने की उम्मीद जगी है। यहां बीआरओ ने जौलजीबी और मुनस्यारी सेक्टर को जोड़ने वाली एक सड़क पर 180 फुट लंबा बेली पुल बनाया है। आगे पढ़िए
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180 फीट लंबे इस पुल को बीआरओ ने महज 9 दिन में तैयार कर लिया। जिसके बाद रविवार से पुल में वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है। सात अगस्त से बीआरओ ने नया पुल बनाने का काम शुरू किया। पुल बनाने में एक पोकलैंड, एक क्रेन और 80 मजदूर लगे। इससे हाल की बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित हुए करीब 20 गांवों को राहत मिलेगी। चीन सीमा के पास बना ये पुल रणनीतिक तौर पर बेहद अहम है। इससे सेना की चीन सीमा तक पहुंच आसान बनेगी। पिथौरागढ़ जिले की सीमा चीन से लगती है। इन दिनों भारत-चीन के बीच तनातनी चल रही है। ऐसे में ये पुल सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा। बीआरओ अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र में 180 फुट लंबा पुल बनाने के लिए बीआरओ ने अपने संसाधन जुटाए। क्षेत्र में लगातार बारिश हो रही है।
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भूस्खलन हो रहा है, ऐसे में बीआरओ की टीम को कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ा। बेली ब्रिज के कुछ हिस्सों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में मुश्किल आई, लेकिन बीआरओ पुल निर्माण का काम पूरा करने में सफल रहा। कई दिनों की कड़ी मेहनत के बाद 16 अगस्त तक पुल बनकर तैयार हो गया। अब जौलजीबी और मुनस्यारी क्षेत्र में कनेक्टिविटी बहाल हो गई है।
आपको बता दें कि 27 जुलाई को जिले के जौलजीबी सेक्टर में बादल फटने से नदियां और नाले उफान पर आ गए थे। यहां एक बड़ा भूस्खलन भी हुआ था। जिसमें जौलजीबी और मुनस्यारी रोड पर बना पुल पूरी तरह ध्वस्त हो गया था। अब बीआरओ ने इस पुल को दोबारा बनाने में सफलता पाई है। पुल बनने के बाद जौलजीबी-मुनस्यारी के बीच कनेक्टिविटी बहाल हो गई है।