भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के रिटायरमेंट के बाद एक उम्मीद जगी है कि धोनी अल्मोड़ा स्थित अपने पैतृक गांव में वापस लौटेंगे और पलायन एवं रोजगार जैसे गंभीर मुद्दों के ऊपर काम भी करेंगे।
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Komal Negi
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Image: People of Uttarakhand appeal to Mahendra Singh Dhoni
अल्मोड़ा: हाल ही में बीता 15 अगस्त वह दिन था जिस दिन सैकड़ों क्रिकेट फैंस का दिल हमेशा हमेशा के लिए टूट गया। 'कैप्टन कूल" के नाम से विश्व प्रसिद्ध क्रिकेटर और भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपने रिटायरमेंट की पोस्ट करके सैकड़ों लोगों को रुला दिया। महेंद्र सिंह धोनी ने अपनी क्रिकेट की पूरी यात्रा में सैकड़ों बार लोगों का दिल जीता है। इन दिनों महेंद्र सिंह धोनी काफी सुर्खियों में हैं। 2011 के वर्ल्डकप में अपने अंतिम हेलीकॉप्टर शॉट से हर कोई उनको याद रखता है। भारत के दिग्गज बल्लेबाजों में से एक महेंद्र सिंह धोनी उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले से नाता रखते हैं। जी हां, महेंद्र सिंह धोनी उत्तराखंड के मूल निवासी हैं। उनका पैतृक गांव ल्वाली अल्मोड़ा जिले में स्थित है। मगर दुर्भाग्य यह है कि 15 सालों से धोनी ने अपने गांव की ओर रुख नहीं किया। उनका गांव भी उत्तराखंड के अधिकांश गांवों की तरह भारी पलायन का शिकार है। आगे पढ़िए
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आज भी अल्मोड़ा के ल्वाली गांव में कई मूलभूत सुविधाएं ऐसी हैं जिनसे लोग वंचित हैं। वहीं ग्रामीणों के बीच यह विश्वास अब भी बरकरार है कि उनके गांव के अंतरराष्ट्रीय बल्लेबाज क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद कभी अपने पैतृक गांव जरूर पहुंचेंगे। महेंद्र सिंह धोनी अपने परिवार समेत आखिरी बार 2004 में अपने गांव गए थे। महेंद्र सिंह धोनी के पिता पान सिंह ने तकरीबन 40 साल पहले रोजगार के लिए अपना पैतृक गांव छोड़ दिया था और वह रांची चले गए थे। उसके बाद से वे परिवार समेत वहीं पर रह हैं। हालांकि आज भी धोनी के पिता धार्मिक आयोजनों में अपने गांव आते हैं। वहीं धोनी की रिटायरमेंट के बाद उत्तराखंड के लोगों के अंदर एक उम्मीद जगी है कि धोनी अब अपने पैतृक गांव में आएंगे और पलायन एवं रोजगार जैसे गंभीर मुद्दों के ऊपर काम भी करेंगे। महेंद्र सिंह धोनी की पत्नी साक्षी रावत खुद भी देहरादून की मूल निवासी हैं। महेंद्र सिंह धोनी अक्सर अपने परिवार के साथ छुट्टी बिताने के लिए देहरादून मसूरी जाते हैं। धोनी के रिटायर होने के बाद समस्त उत्तराखंड यह चाहता है कि वह वे उत्तराखंड वापस लौट आएं और उत्तराखंड के विकास में भी अपना बड़ा सहयोग दें।
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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट ने ट्वीट कर धोनी को अपने मूल निवास में लौटने की अपील की।
धोनी की शादी भी उत्तराखंड के रीति रिवाज से हुई है, और उनके माता-पिता अक्सर देवी- देवताओं की पूजा के लिए अपने पैतृक गांव जाते रहते हैं। 2004 में जब महेंद्र सिंह धोनी आखरी बार अपने गांव गए थे, तब गांव में बड़ी संख्या में लोग रहते थे, मगर बीते 14 सालों में उनका गांव भी पलायन का शिकार हुआ और भारी संख्या में लोगों ने एक-एक करके गांव छोड़ दिया। शायद यही वजह है कि गांव में अब 16 से लेकर 45 वर्ष के बीच का कोई भी व्यक्ति नजर नहीं आता है। गांव की कुल आबादी 100 लोगों से भी कम है। यही कारण है कि उत्तराखंड और उनके गांव के लोग चाहते हैं कि महेंद्र सिंह धोनी अपने राज्य, अपने गांव, अपनी जड़ों में वापस लौट कर वहां के युवाओं को रोजगार के लिए प्रेरित करें।