उत्तराखंड: जिसने नौजवानों को नेशनल लेवल तक पहुंचाया, आज उस 'द्रोणाचार्य' की हालत देखो

कई फुटबॉल खिलाड़ियों को सफलता के शिखर तक पहुंचाने वाले फुटबाल कोच मो. इदरीश बाबा उम्र के आखिरी पड़ाव में असहाय हो गए हैं। आगे पढ़िए पूरी रिपोर्ट
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प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।

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Almora news: Uttarakhand football coach idrees baba need help
Image: Uttarakhand football coach idrees baba need help

अल्मोड़ा: उगते सूरज को सब सलाम करते हैं, लेकिन इसकी चमक के लिए जो सितारे अपना अस्तित्व गंवा देते हैं, उन्हें कोई याद नहीं रखता। वयोवृद्ध फुटबॉल कोच मो. इदरीश बाबा इस कड़ुवी हकीकत की जीती-जागती मिसाल हैं। कई फुटबॉल खिलाड़ियों को सफलता के शिखर तक पहुंचाने वाले फुटबाल कोच मो. इदरीश बाबा उम्र के आखिरी पड़ाव में असहाय हो गए हैं। आर्थिक मोर्चे पर कई तरह की दिक्कतें झेल रहे मो. इदरीश बीमार हैं। बीमारी और आर्थिक मजबूरियों ने उन्हें बुरी तरह तोड़कर रख दिया है, लेकिन उत्तराखंड के इस असहाय द्रोणाचार्य की अब तक किसी ने सुध नहीं ली। अल्मोड़ा, रानीखेत के जरूरी बाजार निवासी 78 साल के इदरीश बाबा ने अपनी जिंदगी में कई उपलब्धियां हासिल कीं। वो 50 साल तक कई फुटबॉल खिलाड़ियों को तराशते रहे, लेकिन दो साल पहले उन्हें बीमारी ने जकड़ लिया। अब वह असहाय हैं। फुटबॉल से बेपनाह प्यार करने वाले इदरीश बाबा ने अपनी जिंदगी की सारी जमापूंजी फुटबॉल और खिलाड़ियों को तराशने में लगा दी। अब उनके पास सुनहरे दौर की खूबसूरत यादों के अलावा कुछ नहीं बचा। पहले से एकाकी जीवन जी रहे बाबा इदरीश की तबीयत खराब है और उनकी कोई सुध लेने वाला कोई नहीं है।

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इदरीश बाबा ने जिन खिलाड़ियों को तराशकर नेशनल लेवल तक पहुंचाया उनमें पुष्कर अधिकारी (यूनिवर्सिटी और नेशनल), प्रताप सिंह बिष्ट (नेशनल), दिनेश भैसोड़ा (नॉर्थ जोन), अब्दुल रिजवान (नेशनल), विशन सिंह बिष्ट (नेशनल), दीवान राणा (स्टेट), मान सिंह परमार (नेशनल), नरेंद्र पुरी (कमांड स्तर), मनोज भट्ट (नेशनल), नजीर खान (स्टेट), कुंदन सिंह (नेशनल), जतिन जुयाल (नेशनल), अमन कन्नौजिया (तीन बार नेशनल), पंकज अधिकारी (संतोष ट्रॉफी), त्रिभुवन असवाल (नेशनल) और परमेश्वर कांडपाल (संतोष ट्राफी) जैसे कई नाम शामिल हैं। बाबा इदरीश के प्रयासों से क्षेत्र के 12 से ज्यादा खिलाड़ी फुटबॉल की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंचे। इनमें से राहुल वर्मा को दो बार नेशनल खेलने का मौका मिला। बाबा इदरीश के सिखाए खिलाड़ी आज सेना और दूसरे अन्य विभागों में अच्छे पदों पर कार्यरत हैं, लेकिन जब बाबा इदरीश को सचमुच किसी की मदद की जरूरत है, तब उनकी मदद के लिए कोई आगे नहीं आया। बाबा इदरीश फटेहाल जिंदगी जी रहे हैं। राज्य समीक्षा को पूरी उम्मीद है कि इस खबर को पढ़कर कोई ना कोई बाबा इदरीश की मदद के लिए जरूर आगे आएगा। शासन-प्रशासन और उनके सिखाए खिलाड़ी उनकी मदद के लिए हाथ बढ़ाएंगे।