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जहां आज भी सिर्फ चरवाहे जाते हैं – केदार हिमालय के अनदेखे ट्रेक्स
प्रकृति, शांति और हिमालय – केदार के गुप्त ट्रेक्स.. यहां कदम रखते ही बदल जाती है सांस और सोच – Hidden Kedar Trails
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अल्मोड़ा: उत्तराखंड महज अपनी वादियों के लिए ही नहीं बल्कि अपनी सैन्य परंपरा के लिए भी देश भर में प्रसिद्ध है। भारतीय सेना और उत्तराखंड देव भूमि का संबंध काफी पुराना है। उत्तराखंड के सैंकड़ों युवा भारतीय सेना का अटूट अंग हैं और सैकड़ों वर्षों से चलती आ रही सैन्य परंपरा को वे आगे बढ़ा रहे हैं। इस देवभूमि में कई ऐसे सपूतों और वीरों ने जन्म लिया है जिन्होंने अपनी जान गंवा कर वतन की रक्षा की है। आज भी वे शौर्यवीर हमारी स्मृतियों में जिंदा हैं और उनका नाम अतीत के पन्नों में हमेशा-हमेशा के लिए दर्ज है। देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों में से एक हैं अल्मोड़ा जिले के लांस नायक गोपाल सिंह जिन्होंने 22 सितंबर के दिन 30 साल पहले चार घुसपैठियों को मौत के घाट उतार कर भारत के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। उनके इस साहस के लिए लांस नायक गोपाल सिंह को मरणोपरांत सेना मेडल से भी नवाजा गया था। बता दें कि बीते मंगलवार को जिला सैनिक लीग ने शहीद लांस नायक गोपाल सिंह के शहीदी दिवस पर उनके घर जाकर उनको श्रद्धांजलि दी और उनके परिवार को सांत्वना दी।