च्यूरा के पेड़ को लोग कल्पवृक्ष भी कहते हैं, वो इसलिए क्योंकि ये पेड़ उनकी कई जरूरतें पूरी करता है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट इस बारे में बहुत कुछ बता रहे हैं। आगे देखिए वीडियो
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Komal Negi
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Image: benefit of Chyoora tree of uttarakhand
पिथौरागढ़: कुदरत ने उत्तराखंड को अपनी अनमोल नेमतों से नवाजा है। यहां के पर्वत-जंगल औषधीय गुणों वाली जड़ी-बूटियों का भंडार हैं। पहाड़ के बड़े-बुजुर्ग इन वनस्पतियों के औषधीय गुणों के बारे में जानते थे, यही वजह है कि पुराने जमाने में पहाड़ के लोग लंबी उम्र जीते थे, उन्हें वक्त-बेवक्त अस्पताल का मुंह नहीं देखना पड़ता था। लेकिन बुजुर्गों का सहेजा गया ये ज्ञान धीरे-धीरे लुप्त होता जा रहा है। इसके संरक्षण की जरूरत महसूस की जा रही है। आज हम आपको पहाड़ के एक ऐसे ही खास फल के बारे में बताएंगे, जो औषधीय गुणों का भंडार है। कुमाऊं के लोग इसके गुणों के बारे में अच्छी तरह जानते हैं, लेकिन अब भी ज्यादातर लोग इसकी मेडिशनल वेल्यू से अनजान ही हैं। जिस फल की हम बात कर रहें है उसे च्यूरा के नाम से जाना जाता है।
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हाल ही में इस से जुड़ा एक वीडियो मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट ने अपने फेसबुक पेज पर साझा किया। रमेश भट्ट पहाड़ के हित से जुड़े मुद्दों पर अक्सर बात करते रहते हैं। सोशल मीडिया पर कई नई जानकारियां शेयर करते हैं। इसी कड़ी में उन्होंने च्यूरा फल के इस्तेमाल और इसकी मेडिशनल वैल्यू से जुड़ा एक वीडियो अपने फेसबुक पेज पर साझा किया है। पहले ये वीडियो देख लीजिए
#च्यूरा यानी डिप्लोनेमा ब्यूटिगेसिया कुमाऊँ की सरयू घाटी में पाया जाने वाला ऐसा पौधा जो लोगों की #आजीविका का साधन बन सकता है।स्थानीय लोग इसे कल्पवृक्ष की संज्ञा देते हैं।  च्यूरा वनस्पति तेल, घी,शहद, साबुन आदि के उत्पादन में प्रमुख रॉ मटीरियल का काम करता है। इस तरफ ध्यान दिया जाय तो स्थानीय #कृषकों की आय में जबरदस्त इजाफा हो सकता है।
Trivendra Singh Rawat
#atmanirbharbharat
#atmanirbharuttarakhand
#AtmaNirbharKrishi
#atmanirbharkisan
#vocalforlocal
Posted by Ramesh Bhatt on Wednesday, September 23, 2020
कुमाऊं की सरयू घाटी में मिलने वाले च्यूरा का बॉटेनिकल नाम ब्यूटिगेसिया है, जिसे आम बोलचाल की भाषा में च्यूरा कहते हैं।
पिथौरागढ़ में प्रचुर मात्रा में मिलने वाले च्यूरा के पेड़ को लोग कल्पवृक्ष भी कहते हैं, वो इसलिए क्योंकि ये एक पेड़ उनकी कई जरूरतें पूरी करता है। इसके पेड़ की पत्तियां मवेशियों के चारे में इस्तेमाल होती हैं, जबकि फल के कई इस्तेमाल है।
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च्यूरा के फल से गांव वाले घी तैयार करते हैं। आमतौर पर घी-वनस्पति तेल महंगे होते हैं। सेहत के लिए फायदेमंद भी नहीं माने जाते, लेकिन च्यूरा के पल्प से तैयार घी सेहत का खजाना है। इससे लोगों की सेहत के साथ-साथ उनकी जेब को भी फायदा होता है। च्यूरा का सेवन हृदयरोगियों के लिए फायदेमंद है। ये गैस संबंधी प्रॉब्लम को दूर करता है। ब्लड प्रेशर के रोगियों को भी इसके सेवन से फायदा होता है। च्यूरा के घी का इस्तेमाल लोग स्किन डिजीज में करते हैं, जिससे घाव जल्दी भर जाते हैं। पहाड़ में मिलने वाला ये फल उत्तराखंड के किसानों की आजीविका का बढ़िया जरिया बन सकता है। चलिए अब आपको च्यूरा के मेडिशनल गुणों पर तैयार वीडियो दिखाते हैं, जिसे सीएम के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट ने अपने सोशल मीडिया पेज पर शेयर किया है। आगे देखें वीडियो