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केदार हिमालय के ऐसे ट्रेक जहां रास्ता खुद आपको चुनता है
बुग्याल, हिमालयी वन और बर्फीली चोटियों का अद्भुत नज़ारा। आध्यात्म, रोमांच और एकांत का अनोखा संगम।
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नैनीताल: यह सत्य है कि कोरोना काल में कई लोगों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन में पहाड़ के सैकड़ों युवा भी शहरों में अपनी नौकरी से हाथ धो कर गांव की ओर वापस आ गए हैं। पलायन के दौर में अचानक ही उत्तराखंड में रिवर्स पलायन हुआ और कई युवकों ने अपने अपने गांव की ओर रुख किया। युवकों के आने से उत्तराखंड के लगभग सभी गांव वापस से आबाद हो चुके हैं। मगर अब युवाओं के सामने रोजगार एक बड़ी चुनौती बनकर सामने खड़ा हुआ है। शहरों में नौकरी कर रहे युवा इस समय गांव में बेरोजगार हैं। ऐसे में स्वरोजगार ही है जो उनकी डूबती नैया को पार लगा सकता है। स्वरोजगार वह जरिया है जिसमें आप गांव में बैठे-बैठे ही शहरों से अच्छी कमाई कर सकते हैं। कई युवाओं के बीच में यह मिथ पल रहा है कि स्वरोजगार से अच्छी कमाई नहीं हो सकती। मगर उत्तराखंड के कई युवाओं ने यह साबित किया है कि स्वरोजगार से जिंदगी संवर सकती है। स्वरोजगार के पथ पर सफलता हासिल करने वालों की सूची में अपना नाम शामिल किया है उत्तराखंड के दो भाइयों ने जो इस समय स्वरोजगार की जीती-जागती मिसाल समाज के आगे पेश कर रहे हैं।