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जहां आज भी सिर्फ चरवाहे जाते हैं – केदार हिमालय के अनदेखे ट्रेक्स
प्रकृति, शांति और हिमालय – केदार के गुप्त ट्रेक्स.. यहां कदम रखते ही बदल जाती है सांस और सोच – Hidden Kedar Trails
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नैनीताल: ये कहानी पहाड़ के दो भाईयों की है। दूसरे हजारों पहाड़ी भाईयों की तरह कोरोना काल इनके लिए भी मुसीबत बनकर आया। दोनों भाई पहले शहर में नौकरी करते थे, लेकिन कोरोना महामारी ने कमाई का वो जरिया भी छीन लिया। तब दोनों भाई गांव लौट आए। ये लोग चाहते तो दूसरे लोगों की तरह हालात बेहतर होने का इंतजार कर सकते थे, लेकिन इन्होंने ऐसा करने की बजाय खुद का काम शुरू करने की ठानी। जहां चाह, वहां राह। आज एक भाई जहां नैनीताल में चप्पल बनाने का काम शुरू कर चुका है, तो वहीं दूसरा पशुपालन और एलईडी बल्ब बनाकर अच्छी कमाई कर रहा है। इनका नाम है श्यामसुंदर और जीवन। दोनों सगे भाई नैनीताल के बेतालघाट में रहते हैं। आपदा को अवसर में कैसे बदलना है, ये कोई इन दोनों भाईयों से सीखे। लॉकडाउन से पहले श्यामसुंदर चंडीगढ़ में जॉब कर रहे थे। वो किसी कंपनी में एकाउंटेंट थे। आगे पढ़िए