पहाड़ के रिटायर फौजी ने फ्री में नौजवानों को किया फौज के लिए तैयार..दिखने लगे बेहतर परिणाम

फौजी राजेश सेमवाल जब भी छुट्टी पर घर आते तो गांव के युवाओं को नशे की गिरफ्त में देख उनका दिल टूट जाता, तब राजेश ने युवाओं और अपने क्षेत्र के लिए कुछ करने की ठानी। आगे पढ़िए पूरी खबर
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Uttarkashi News: Uttarkashi Retire Army Rajesh Semwal
Image: Uttarkashi Retire Army Rajesh Semwal

उत्तरकाशी: कहते हैं एक फौजी भले ही फौज से रिटायर हो जाए, लेकिन उसका मिशन देश सेवा हमेशा जारी रहता है। उत्तरकाशी के राजेश सेमवाल इसकी जीती-जागती मिसाल हैं। सेना से रिटायर होने के बाद राजेश सेमवाल नशे की तरफ बढ़ते युवाओं को सही राह दिखाकर उन्हे देश सेवा के लिए तैयार कर रहे हैं। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने पुरोला में नौजवानों के लिए निशुल्क भर्ती प्रशिक्षण कैंप शुरू किया। जिसमें पुरोला और मोरी के 80 युवाओं को ढाई महीने की ट्रेनिंग दी गई। फौजी राजेश सेमवाल ने जो मुहिम शुरू की थी, अब उसके सुखद नतीजे भी दिखने लगे हैं। पिछले दिनों गांव के 80 युवाओं ने कोटद्वार में हुई भर्ती रैली में हिस्सा लिया था। जिनमें से 65 युवाओं ने शारीरिक दक्षता परीक्षा पास कर ली है। ट्रेनिंग लेने वाले युवाओं के बेहतरीन प्रदर्शन पर राजेश सेमवाल ने खुशी जताई। राजेश सेमवाल पुरोला ब्लॉक के छानिका गांव के रहने वाले हैं। वो जुलाई में गढ़वाल राइफल्स से रिटायर हुए हैं। रिटायरमेंट के बाद गांव लौटते ही राजेश अपने मिशन में जुट गए..आगे पढ़िए

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राजेश बताते हैं कि वो जब भी छुट्टी में घर आते थे तो गांव के युवाओं को शराब, चरस और स्मैक के नशे में देखते थे। नशे की ओर बढ़ती युवा पीढ़ी को देख उन्होंने तय किया कि वो जब भी गांव वापस लौटेंगे, युवाओं को नशे की गिरफ्त से आजाद कराने के लिए काम करेंगे। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने युवाओं को सेना में भर्ती के लिए प्रेरित किया। पुरोला में एक निशुल्क ट्रेनिंग कैंप खोला। जिसमें सुदूरवर्ती क्षेत्रों के 80 युवाओं के रहने-खाने की व्यवस्था की गई। राजेश का हौसला देखकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी उन्हें हरसंभव मदद दी। अब राजेश सेमवाल से ट्रेनिंग लेने वाले 80 युवाओं में से 65 ने गढ़वाल राइफल्स की शारीरिक परीक्षा पास कर ली है। राजेश सेमवाल जैसे लोग पहाड़ में बेहतरी की उम्मीद जगा रहे हैं। राज्य समीक्षा टीम नशे के खिलाफ अभियान छेड़ने वाले राजेश सेमवाल जैसे लोगों को सलाम करती है। अगर आपको अपने आस-पास भी ऐसी ही कोई प्रेरणादायी कहानी दिखे, तो हमें जरूर बताएं। हम इन्हें मंच देने का प्रयास करेंगे।