उत्तराखंड: बचपन में भाई को उतारा मौत के घाट, बाद में पत्नी को मारा ..अब गिरफ्तार हुआ हैवान

विश्वजीत ने साल 1994 में मामूली सी बात पर अपने बड़े भाई गोपाल मलिक की हत्या कर दी थी। 25 नवंबर 2015 को उसने अपनी पत्नी को भी मार डाला। वारदात को अंजाम देने के बाद से वो फरार चल रहा था।
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Udham Singh Nagar Vishwajeet: Vishwajit of Udham Singh Nagar arrested from Kanpur
Image: Vishwajit of Udham Singh Nagar arrested from Kanpur

उधमसिंह नगर: गलती और गुनाह में बड़ा फर्क होता है। गलतियां अगर समय पर ना सुधारी जाएं तो इन्हें आदत बनते देर नहीं लगती। ऊधमसिंहनगर के रहने वाले विश्वजीत मलिक के केस में भी यही हुआ। बचपन में मामूली सी बात पर अपने भाई की हत्या करने वाला विश्वजीत खुद को कानून से ऊपर समझ बैठा था। भाई को मारने का उसे कोई पछतावा नहीं था। पांच साल पहले उसने हरिद्वार में अपनी पत्नी की भी हत्या कर दी, लेकिन कहते हैं ना कि कानून के हाथ लंबे होते हैं। देर से ही सही अपराधी के गरेबान तक पहुंच ही जाते हैं। फरार हुआ इनामी बदमाश विश्वजीत भी पांच साल बाद पकड़ा गया। स्पेशल टास्क फोर्स ने उसे यूपी के कानपुर से गिरफ्तार किया है। एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने मामले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि ऊधमसिंहनगर के सितारगंज में रहने वाले विश्वजीत मलिक ने 25 नवंबर 2015 को अपनी पत्नी की हत्या कर दी थी। वारदात को अंजाम देने के बाद से वो फरार चल रहा था। पुलिस और एसटीएफ उसकी तलाश में जुटे थे। हरिद्वार पुलिस ने उस पर पांच हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया था। पिछले दिनों पुलिस को खबर मिली कि विश्वजीत कानपुर में कहीं छिपा हुआ है। आगे पढ़िए

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खबर पक्की थी। इसके बाद आरोपी की गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ और हरिद्वार पुलिस की संयुक्त टीम गठित की गई। टीम ने कानपुर पहुंचकर विश्वजीत की तलाश शुरू कर दी। दस दिन की मेहनत के बाद पता चला कि विश्वजीत कानपुर के रसूलाबाद में महेंद्रनगर गांव में पहचान बदल कर रह रहा है। शुक्रवार को पुलिस ने गांव में छापा मारकर विश्वजीत को धर दबोचा। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसके पत्नी से संबंध अच्छे नहीं थे। पत्नी छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा करती थी। परेशान होकर पांच साल पहले उसने ससुराल हरिद्वार पहुंच कर उसकी हत्या कर दी। तब से वो पुलिस से बचने के लिए जगह-जगह छिपता फिर रहा था। विश्वजीत ने साल 1994 में मामूली सी बात पर अपने बड़े भाई गोपाल मलिक की हत्या कर दी थी। सितारगंज पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर बाल सुधार गृह हल्द्वानी भेज दिया था। जहां से वो छह महीने बाद छूट गया, लेकिन तब तक अपराध करना उसकी जिंदगी का हिस्सा बन चुका था। आरोपी अब पुलिस की गिरफ्त में है।