गढ़वाल का विकास सेमवाल..नौकरी के लिए छोड़ा था गांव, आज जापान में हैं खुद के 4 रेस्टोरेंट

जापान में रेस्टोरेंट्स का संचालन करने वाले विकास ने न सिर्फ खुद को बुलंदियों तक पहुंचाया, बल्कि अपने क्षेत्र के कई युवाओं को भी रोजगार से जोड़ा। जानिए उनकी कहानी
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Vikas Semwal Tehri Garhwal: Story of Vikas Semwal of Tehri Garhwal
Image: Story of Vikas Semwal of Tehri Garhwal

टिहरी गढ़वाल: किसी ने सच ही कहा है संघर्ष जितना मुश्किल हो, जीत उतनी ही शानदार होगी। इस लाइन को नई टिहरी के रहने वाले विकास सेमवाल से बेहतर भला कौन समझ सकता है। विकास उन लोगों में शामिल हैं, जिन्हें कभी रोजगार के लिए अपना गांव छोड़ना पड़ा था। आज पहाड़ का ये युवा जापान में उत्तराखंड का परचम लहरा रहा है। जापान के ओसाका शहर में विकास जेजीकेपी नाम से रेस्टोरेंट की चेन का संचालन करते हैं। जब आप इस जेजीकेपी की फुल फॉर्म जानेंगे तो आपको भी विकास की सोच पर गर्व होगा। जेजीकेपी यानी जय गुरु कैलापीर। इस तरह विकास ने काम की तलाश में पहाड़ छोड़ा तो जरूर, लेकिन वो पहाड़ का एक हिस्सा अपने साथ ही ले गए, जिसे वो आज भी जी रहे हैं। जापान में रेस्टोरेंट्स का संचालन करने वाले विकास ने न सिर्फ खुद को बुलंदियों तक पहुंचाया, बल्कि अपने क्षेत्र के कई युवाओं को भी रोजगार से जोड़ा। विकास सेमवाल मूलरूप से बूढ़ाकेदार क्षेत्र के रहने वाले हैं। जापान में उनके पांच रेस्टोरेंट हैं। जिनमें से एक का संचालन वो खुद करते हैं, जबकि 4 रेस्टोरेंट उनके माध्यम से दूसरे लोग चला रहे हैं। विकास की हमेशा कोशिश होती है कि पहाड़ के लोगों को अपने यहां काम दिया जाए। आगे पढ़िए

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उन्होंने 10 स्थानीय निवासियों को जापान में रोजगार भी उपलब्ध कराया है। 42 साल के विकास ने उच्च शिक्षा हासिल की है। उन्होंने साल 2009 में मेरठ से कंप्यूटर साइंस से बीटेक किया। बाद में वो जापान चले गए और वहां एक कंसल्टेंसी में बतौर कंप्यूटर इंजीनियर जॉब करने लगे। इसी बीच 2011 में वैश्विक मंदी का दौर शुरू हुआ। विकास की जॉब चली गई, लेकिन उन्होंने मुसीबत के वक्त में हिम्मत नहीं हारी और जापान में ही रोजगार शुरू करने की ठानी। साल 2013 में उन्होंने पहला रेस्टोरेंट खोला। अगले ही साल वो अपने परिवार को भी जापान ले गए। रेस्टोरेंट के नाम को लेकर विकास कहते हैं कि हमारे क्षेत्र के लोगों की गुरु कैलापीर देवता में अटूट श्रद्धा है। नौकरी छूटने के बाद उन्होंने अपने आराध्य देव को याद किया और भगवान का नाम लेकर काम शुरू कर दिया। आज विकास की गिनती जापान के सफल कारोबारियों में होती है। जापान में रहने के बावजूद विकास पहाड़ से जुड़े हुए हैं, साथ ही वो क्षेत्र के लोगों को रोजगार से जोड़ने के लिए भी प्रयासरत हैं।