बड़ी खबर: उत्तराखंड-नेपाल सीमा पर गलवान घाटी की तरह माहौल बिगाड़ने की कोशिश

गलवान घाटी में भारत पर कायरों की तरह पीछे से वार करने के बाद नेपाल ने उत्तराखंड में भी उपद्रव करने की कोशिश की।
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Uttarakhand Nepal Border: Attempt to disturb the Uttarakhand Nepal border
Image: Attempt to disturb the Uttarakhand Nepal border

पिथौरागढ़: बीते कुछ महीनों से भारत और नेपाल के रिश्तों पर काफी चर्चा हुई है। चर्चा का केंद्रीय बिंदु रहा दोनों देशों के बीच का पुराना सीमा विवाद और इस विवाद में नेपाल की स्थिति को लेकर वहां की सरकार का भारत के खिलाफ आक्रामक रवैया अपनाती नजर आ रही है। चीन, नेपाल को लगातार भारत के खिलाफ उकसा रहा है और नेपाल अपनी हरकतों से बाज आता नजर नहीं आ रहा है। गलवान घाटी की घटना को ज्यादा समय नहीं बीता है। गलवान घाटी में भारत पर कायरों की तरह पीछे से वार करने के बाद नेपाल ने उत्तराखंड में भी उपद्रव करने की कोशिश की। एक न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक एसएसबी सीमांत मुख्यालय रानीखेत के उपमहानिरीक्षक मनमोहन कांडपाल ने यह दावा किया है कि गलवान घाट की घटना के बाद नेपाल सीमा पर भी उपद्रव कोशिश की गई है लेकिन एसएसबी के जवानों ने बिना किसी पलटवार के और उकसावे में ना आकर शांतिपूर्वक तरीके से परिस्थितियों को संभाला। उन्होंने कहा कि एसएसबी के जवानों के संयम के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी अधिक सराहना भी हुई है।

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बीते सोमवार को सीमांत मुख्यालय के 11वें स्थापना दिवस पर पत्रकार वार्ता हुई थी जिसमें डीआईजी मनमोहन कांडपाल ने इस बात की पुष्टि की है कि गलवान घाटी की घटना के बाद चीन के दबाव पर नेपाल सीमा पर भी भारत के खिलाफ उकसावे की कोशिश हुई। उन्होंने कहा कि वहां की कम्युनिस्ट सरकार ने नेपाल की तरफ से सीमा पर अशांति फैला कर माहौल बिगाड़ने का भी पूरा प्रयास किया और अशांति भी फैलाई मगर सीमा पर मौजूद एसएसबी के जवानों ने उनको जवाब देने के बजाय संयम से काम रखा और इन विषम परिस्थितियों में भी संयम और शांति के साथ लिया। उन्होंने बताया कि एसएसबी के जवानों की बदौलत ही मामला संभल गया। डीआईजी कांडपाल ने कहा कि नेपाल की ओर से हमेशा से ही उपद्रवी तत्व ऐसी हरकतें करते रहते हैं। मगर इसी के साथ में उन्होंने कहा कि नेपाल से भारत का सुरक्षा संबंधी किसी भी तरह का मुद्दा नहीं है।