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जहां आज भी सिर्फ चरवाहे जाते हैं – केदार हिमालय के अनदेखे ट्रेक्स
प्रकृति, शांति और हिमालय – केदार के गुप्त ट्रेक्स.. यहां कदम रखते ही बदल जाती है सांस और सोच – Hidden Kedar Trails
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पिथौरागढ़: पिछले महीने ग्लेशियर टूटने की वजह से चमोली जिले में भारी तबाही मची थी। अब ऐसा ही कुछ उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में हुआ है। यहां धारचूला में ग्लेशियर खिसकने से दस किलोमीटर क्षेत्र में जगह-जगह सड़क बंद हो गई है। वाहनों की आवाजाही नहीं हो पा रही। उच्च हिमालयी क्षेत्र में निर्माणाधीन सेला-बॉलिंग मार्ग में हर तरफ बर्फ और मलबा पड़ा है। पंचाचूली गए चार युवकों ने वापस लौटने पर इसका खुलासा किया। ग्लेशियर खिसकने से सीपू-मार्छा को जोड़ने वाला पुल भी बह गया है। सीमा से सटे इस इलाके में सड़क बंद होने से सेना को भी भारी दिक्कतों को सामना करना पड़ रहा है। भारत-चीन सीमा पर तैनात जवानों के लिए आवाजाही करना मुश्किल हो गया है। ग्लेशियर पिघलने से सीपू-मार्छा को जोड़ने वाला पुल भी नहीं बचा, जिस वजह से माइग्रेशन पर जाने वाले लोग परेशान हैं। ग्लेशियर पिघलने से सीपू गांव में भी आवाजाही ठप हो गई है। सीपू गांव दारमा घाटी का आखिरी गांव है। सीपू को मार्छा से जोड़ने वाले रास्ते में एक लकड़ी का पुल हुआ करता था, लेकिन ग्लेशियर खिसकने से ये पुल भी बह गया। आगे पढ़िए