कौसानी में फोटोग्राफी कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान छायाकारों ने खगोलीय फोटोग्राफी के माध्यम से अंतरिक्ष की खूबसूरती को भी कैमरे में कैद किया।
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Komal negi
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Image: Five day photography workshop in Kausani
अल्मोड़ा: प्रकृति खुद में बेहद अनोखी और खूबसूरत कलाकार है। इसकी कलाकृतियां हमें अक्सर हैरान कर देती हैं। प्रकृति के अद्भुत नजारों को हम निगाहों में हमेशा के लिए समेट कर रख लेना चाहते हैं, और फोटोग्राफी ऐसा करने में हमारी मदद करती है। किसी ऊंचे पहाड़ की चोटी से उगते सूरज को देखने का नजारा हो या फिर तारों की चादर ओढ़े खूबसूरत आकाश को देखना....ये मनमोहक नजारे कैमरे के जरिए हमारी आंखों में हमेशा के लिए बस जाते हैं। कौसानी में इन दिनों तस्वीरों के माध्यम से प्रकृति के ऐसे ही कई खूबसूरत नजारों के दीदार हो रहे हैं। यहां कौसानी के बुरांश रिट्रीट में पांच दिवसीय फोटोग्राफी कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें देशभर से आए 37 फोटोग्राफर्स ने कौसानी, ग्वालदम और बैजनाथ की हसीन वादियों का दीदार कर मनमोहक तस्वीरें खींची। इस दौरान फोटोग्राफर्स ने खगोलीय फोटोग्राफी के माध्यम से अंतरिक्ष की खूबसूरती को भी कैमरे में कैद किया। सोमवार को कार्यशाला का शुभारंभ उत्तराखंड दर्शन स्लाइड शो के माध्यम से हुआ। इस दौरान छायाकारों ने चित्रों के माध्यम से उत्तराखंड के अलग-अलग क्षेत्रों की खूबसूरती को दिखाया। कार्यशाला के आयोजक थ्रीश कपूर ने छायाकारों को घाटी, नदी और हिमालय पर्वत के चित्रों संबंधित जानकारी दी।
जयपुर के अनिल गोगिना ने पोट्रेट फोटोग्राफी और एस्ट्रो फोटोग्राफी के बारे में बताया। ये कार्यशाला अपने आप में बेहद खास रही। वर्कशॉप में फोटोग्राफी के विशेषज्ञों ने अपने अनुभव शेयर करते हुए फोटोग्राफी की बारीकियां भी बताईं। नैनीताल से आए छायाकार अनूप साह ने नेचर फोटोग्राफी के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड अपनी खूबसूरती के लिए दुनिया में मशहूर है। यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। फोटोग्राफी कार्यशाला में आए छायाकारों के जरिए यहां की खूबसूरती को देश के कोने-काने में फैलाने में मदद मिलेगी। इस दौरान उमेश गोगिना ने गैलेक्सी फोटोग्राफी की बारीकियां प्रयोग करके सिखाईं। फोटोग्राफी के दौरान बरती जाने वाली सावधानियां भी बताईं। लखनऊ से आए छायाकार अनिल रिशाल सिंह ने लैंडस्केप फोटोग्राफी में प्रकाश, फोकस और कंपोजिशन की बारीकी को विस्तार से बताया। कार्यशाला का समापन 18 मार्च को होगा।