गजब: पहाड़ में सिर्फ एक वार्ड बॉय के भरोसे चल रहा है ये अस्पताल..इसी के भरोसे हैं 12 गांव

बिना डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं के उत्तरकाशी का यह अस्पताल महज एक वार्ड बॉय के भरोसे संचालित किया जा रहा है।सीएमओ तक को यहां पर डॉक्टर्स के होने की सूचना नहीं है।
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Uttarkashi News: Uttarkashi Tikochi Hospital
Image: Uttarkashi Tikochi Hospital

उत्तरकाशी: पहाड़ों पर स्वास्थ्य सेवाओं की दशा किसी से भी छिपी नहीं है। नेताओं के खोखले वादों के पीछे छिपी असलियत समय-समय पर सबके सामने आती रहती है और उनको यह एहसास कराती रहती है कि उनके वादे केवल इलेक्शन तक सीमित हैं। इलेक्शन खत्म होने के बाद उनके वादे भी कहीं गुम हो जाते हैं। पहाड़ों पर किस हालत में अस्पतालों को चलाया जा रहा है इसका उदाहरण आप उत्तरकाशी जिले में देखिए। आज हम आपको उत्तरकाशी जिले के ऐसे अस्पताल के बारे में बताने जा रहे हैं जिस अस्पताल में ना तो कोई डॉक्टर है और ना ही कोई अन्य स्वास्थ्य सुविधा और वह अस्पताल महज एक वार्ड बॉय के भरोसे संचालित किया जा रहा है। जी हां, अब तो हालत ऐसी है कि वह अस्पताल बंद होने की कगार पर है।हम बात कर रहे हैं उत्तरकाशी के दूरस्थ आराकोट बंगाण क्षेत्र के टिकोची अस्पताल की जो कि बंद होने की कगार पर है। आप जानते हैं कि सबसे हैरान करने वाली बात क्या है? वह यह है कि इस अस्पताल में एक भी डॉक्टर मौजूद नहीं है और यह अस्पताल केवल वार्डबॉय के भरोसे संचालित किया जा रहा है। इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि इस अस्पताल के ऊपर उत्तरकाशी के 12 गांव आश्रित हो रखे हैं। ऐसे में जब अस्पताल में कोई डॉक्टर ही नहीं होगा कोई स्वास्थ्य सुविधा नहीं होगी तो लोग इलाज कहां करवाएंगे। सीएमओ तक को यहां पर डॉक्टर के होने की सूचना ही नहीं है। अब जाकर इस अस्पताल का पूरा मामला प्रकाश में आया है जिसके बाद इस अस्पताल के पूरे मामले में प्रशासन कार्यवाही कर रहा है और जांच-पड़ताल कर रहा है।

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वैसे आप हैरान मत होइए क्योंकि उत्तराखंड में तो अब यह आम हो गया है। उत्तराखंड में न जाने कितने ही ऐसे अस्पताल होंगे जहां पर डॉक्टरों की कमी होगी। मेडिकल फैसिलिटी तो छोड़िए पहाड़ों पर अस्पतालों में अब डॉक्टर तक मिलने नामुमकिन हो गए हैं। चलिए अब आपको उत्तरकाशी के इस अस्पताल के बारे में संक्षिप्त से जानकारी देते हैं। दरअसल 2019 में आराकोट बंगाण क्षेत्र में प्राकृतिक आपदा आई थी और प्राकृतिक आपदा ने इस कदर कहर बरपाया था कि वहां पर राजकीय एलोपैथिक अस्पताल का भवन भी बाढ़ की चपेट में आ गया। जब सब कुछ ठीक हुआ तो एक किराए के भवन में इस अस्पताल का संचालन शुरू हुआ लेकिन लापरवाही की पराकाष्ठा देखिए स्वास्थ्य विभाग यह भूल ही गया कि यह अस्पताल अस्तित्व में है। न ही किसी जन प्रतिनिधि ने और न ही किसी नेता ने इस अस्पताल की सुध ली। बाढ़ में नष्ट हुए इस अस्पताल का संचालन एक भवन में शुरू हुआ और तब से लेकर अब तक इस भवन का किराया भी नहीं दिया गया है जिस कारण यह अस्पताल बंद होने के कगार पर पहुंच गया है। बता दें कि यह अस्पताल महज एक वॉर्ड बॉय के भरोसे चल रहा है। 7 महीने से अधिक का समय हो गया है मगर अस्पताल में न ही कोई डॉक्टर है और ना ही कोई स्वास्थ्य सुविधा। महज एक वॉर्ड बॉय के भरोसे अस्पताल संचालित किया जा रहा है।

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आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि जिस अस्पताल में एक भी डॉक्टर नहीं है, एक भी फार्मेसिस्ट नहीं है और ढंग की स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं हैं उस अस्पताल के ऊपर 12 गांव के ग्रामीण निर्भर हो रखे हैं। ऐसे में इन सब की जान की जिम्मेदारी आखिर किसकी है और अगर कुछ अनहोनी हो जाती है तो सवाल किस पर उठाया जाए। नेताओं के झूठे वादों पर, सरकार पर या फिर उन जनप्रतिनिधियों पर जिनका मकसद महज और महज वोट मांगना होता है। एक वॉर्ड बॉय के भरोसे इस अस्पताल को संचालित किया जा रहा है। यह बेहद शर्मनाक है। अगर कोई क्षेत्र में बीमार हो जाता है या किसी प्रकार की आपातकालीन स्थिति बन जाती है तो प्राथमिक चिकित्सा देने के लिए भी कोई स्वास्थ्य विभाग कर्मचारी अस्पताल में मौजूद है ही नहीं है। इस पूरे मामले की जांच की जा रही है। सीएमओ डॉ. डीपी जोशी का कहना है कि उनको यह पता ही नहीं था कि इस अस्पताल में डॉक्टर नहीं है और यह अस्पताल बंद होने के कगार पर है। उन्होंने कहा है कि इस अस्पताल में डॉक्टर ना होने के बारे में वे जानकारी ले रहे हैं और इस पूरे मामले को गंभीरता देखा जा रहा है। उन्होंने कहा है कि जल्द ही अस्पताल का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा। अस्पताल भवन के लिए धनराशि उपलब्ध हो गई है।