पहाड़ के कासनी गांव के बेटे मनीष को बधाई..विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर फहराया तिरंगा

पिथौरागढ़ के युवा पर्वतारोही 26 वर्षीय मनीष कसनियाल ने बढ़ाया देवभूमि का नाम। भारी चुनौतियों के बाद एवरेस्ट फतेह कर फहराया तिरंगा। आप भी बधाई दें।
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Trails once used by sages, locals, and shepherds. Ideal for travelers seeking silence over social media fame.

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Pithoragarh Manish Kasniyal: Pithoragarh Manish Kasniyal scales Everest peak
Image: Pithoragarh Manish Kasniyal scales Everest peak

पिथौरागढ़: उत्तराखंड के युवा पर्वतारोही 26 वर्षीय मनीष कसनियाल ने उत्तराखंड का और देश भर का नाम विश्व में ऊंचा कर दिया है। युवा पर्वतारोही मनीष ने विश्व की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट पर भारत का तिरंगा फहरा कर उत्तराखंड और भारत को गौरवान्वित किया है। पिथौरागढ़ के कासनी के मूल निवासी मनीष की इस उपलब्धि के बाद उनके गांव और उनके परिवार के बीच में खुशी की लहर छा गई है। आपको बता दें कि मनीष ने अपनी महिला साथी सिक्किम की मनीता प्रधान के साथ विषम परिस्थितियों में एवरेस्ट की ऊंचाइयों को छुआ और एवरेस्ट पर भारत का तिरंगा लगाकर देश और देवभूमि का नाम रोशन किया। मनीष के एवरेस्ट फतह करने की सूचना मिलते ही उनके गृह क्षेत्र में खुशी की लहर छा गई है। मंगलवार की सुबह 5 बजे मनीष ने विश्व की सबसे ऊंची चोटी को फतह कर लिया। समुद्र तल से 8,848 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ना आसान नहीं है और बहुत ही कम लोग इस चोटी पर चढ़ पाए हैं। उन जांबाजों में शामिल हो गए हैं मनीष कसनियाल। पिथौरागढ़ के मनीष ने अपने आत्मविश्वास और अपनी हिम्मत का बखूबी प्रदर्शन कर यह साबित कर दिया है कि अगर कुछ करने की ठान लो तो चाहे कितनी भी विषम परिस्थितियां सामने आ जाएं आपको आपके लक्ष्य से वे दूर नहीं कर सकतीं। आपको बता दें कि सोमवार की रात को तकरीबन 10 बजे बेस कैंप 4 से एवरेस्ट फतह के लिए वे अपनी साथी पर्वतारोही मनीता के साथ निकले थे और मंगलवार की सुबह 5 बजे उन्होंने एवरेस्ट पर तिरंगा फहरा कर इतिहास रच डाला है।

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एवरेस्ट को फतह करने वे 28 मार्च को दिल्ली से नेपाल निकले थे और 6 अप्रैल को उन्होंने अभियान के लिए कड़ा प्रशिक्षण लिया और कड़े प्रशिक्षण के बाद वे अपनी मंजिल की ओर निकल पड़े और आखिरकार उन्होंने एवरेस्ट फतेह कर ही लिया। बता दें कि पर्वतारोही मनीष कसनियाल ने 2018 में भी ब्रिटिश पर्वतारोही जॉन जेम्स कुक के साथ 5782 मीटर ऊंची मुनस्यारी की चोटी नंदा लपाक को पश्चिमी छोर से फतेह किया था। उनको इस अभियान में 1 सप्ताह लग गया था। मनीष को दो बार जयपाल पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है और इसी के साथ उनको राज्य स्वच्छता गौरव सम्मान भी मिल चुका है। इसी के अलावा मनीष बिर्थी में लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड के लिए आईस संस्था के वाटरफॉल रैपलिंग में भी शामिल हो चुके हैं। उन्होंने त्रिशूल, गंगोत्री तृतीय, बलजोरी, लामचीर समेत एक दर्जन से भी अधिक पर्वत मालाएं 2017, 2018 और 2019 में फतेह की हैं।

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मनीष कसनियाल का बचपन से ही साहसिक खेलों से जुड़ाव रहा है और उनका पूरा परिवार उनके एवरेस्ट फतह करने पर गर्व महसूस कर रहा है। मनीष के एवरेस्ट फतह करने की सूचना मिलते ही उनके पिता पूर्व प्रधान सुरेश चंद्र कसनियाल, मां ममता दादी ईश्वरी दत्त समेत सभी लोगों ने मनीष को शुभकामनाएं दी हैं। उनके पिता ने बताया कि नेपाल से उनको बेटे के एवरेस्ट फतेह करने की सूचना मिली। उन्होंने कहा है कि उनको अपने बेटे पर फक्र है। आपको बता दें कि मनीष इतिहास विषय से पोस्ट ग्रेजुएट हैं और साहसिक खेलों में उनकी काफी रूचि है जिस कारण 2008 में वे पर्वतारोहण सीखने के लिए आइस (Intrinsic Climbers and Explorers) संस्था से जुड़े। मनीष ने आईस संस्था के साथ ही सबसे पहले पर्वतारोहण के गुर सीखे। आइस संस्था में उन्होंने प्रशिक्षक बासू पांडेय और जया पांडेय से पर्वतारोहण का हुनर सीखा।