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No reels. No crowds. Just Kedar Himalaya - This trek doesn’t want to be famous..
Alpine meadows, dense forests, and snow-capped peaks in one journey. Suitable for both beginner and experienced trekkers.
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देहरादून: जिंदगी में जब लक्ष्य को पाने की लगन लग जाए तो सफलता भी पीछे-पीछे दौड़ी चली आती है। जो लोग आकाश की ऊंचाई पर होने के बावजूद अपने पांव जमीन पर टिकाए रहते हैं, उन्हें कभी गरने का डर नहीं सताता। वर्ष 2012 बैच की आईआरएस अफसर नेहा नौटियाल ऐसी ही शख्सियत हैं। साल 2012 में 185वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल कर आईआरएस बनीं नेहा नौटियाल उत्तराखंड के देहरादून से ताल्लुक रखती हैं। आज नेहा को हम सफल अफसर के तौर पर जानते हैं, लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए उन्हें भी खूब संघर्ष करना पड़ा। नेहा कहती हैं कि आप जीवन में लक्ष्य कुछ भी तय करें, लेकिन उसे हासिल करने के लिए मानसिक रूप से मजबूत होना बहुत जरूरी है। ऐसा नहीं होने पर कई बार आप लक्ष्य के बिल्कुल करीब पहुंचकर भी फिसल सकते हैं। देहरादून की रहने वाली नेहा के पिता पीके नौटियाल पोस्ट ऑफिस में कार्यरत थे। मां गृहणी हैं। वे दो भाई-बहन हैं और नेहा छोटी हैं।