गढ़वाल का होनहार नौजवान, कोदा (मंडुआ) से बनाए पौष्टिक पिज्जा-बर्गर..बढ़ने लगी डिमांड

कभी देहरादून के होटलों में वेटर का काम करने वाले जसवीर ने पहाड़ी उत्पादों को न सिर्फ एक शानदार मंच दिया, बल्कि गांव के सात युवाओं को रोजगार से भी जोड़ा। जानिए उनकी सक्सेस स्टोरी
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प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।

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Jasvir Singh Aswal: Self-employment of Jasvir Singh Aswal of Uttarkashi
Image: Self-employment of Jasvir Singh Aswal of Uttarkashi

उत्तरकाशी: कोरोना काल हर किसी के लिए मुश्किलें लेकर आया। बीते महीनों में जहां लाखों लोगों ने अपना रोजगार गंवा दिया तो वहीं कुछ लोग ऐसे भी रहे, जिन्होंने इस मौके को कुछ नया और बेहतर करने के अवसर के रूप में देखा। उत्तरकाशी के जसवीर सिंह असवाल ऐसे ही लोगों में से हैं। कई शहरों में काम कर चुके जसवीर ने अपने गांव में फूड कैफे खोला है। जिसमें पिज्जा-बर्गर जैसे फास्ट फूड परोसे जाते हैं, अब आप कहेंगे कि इसमें नया तो कुछ भी नहीं है। ये तो शहर के हर फूड कैफे में मिल जाता है। जसवीर के बनाए फास्ट फूड में नया ये है कि इन्हें नुकसानदायक मैदे से नहीं बल्कि हेल्दी मंडुवे से तैयार किया जाता है। मैदे से बने पिज्जा, बर्गर जैसे फास्ट फूड के नुकसान आपने जरूर सुने होंगे, लेकिन जसवीर ने इसी फास्ट फूड को हेल्दी फूड बनाकर अपने लिए रोजगार की राह तैयार कर ली। उनके कैफे में मंडुवे से बने पिज्जा और बर्गर लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं। 28 साल के जसवीर विकासखंड डुंडा की गाजणा पट्टी के न्यू गांव में रहते हैं। उन्होंने साल 2018 में स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाकर कैफे की शुरूआत की थी, लेकिन यहां तक का सफर उनके लिए आसान नहीं था। आगे पढ़िए

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दून के डीएवी कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई करने वाले जसवीर बताते हैं कि कॉलेज के साथ उन्होंने दून में ही 30 से 40 रेस्टोरेंट व होटलों में वेटर का काम किया। बाद में उन्होंने बेकरी का काम सीखा। एमएससी की पढ़ाई के दौरान उन्होंने अपना काम शुरू करने के बारे में सोचा, लेकिन पैसे की कमी आड़े आ गई। मुसीबत के वक्त में तत्कालीन डीएम आशीष चौहान उनकी मदद के लिए आगे आए और जसवीर को लोन दिलाने में मदद की। इस रकम से उन्होंने गांव में अपना रेस्टोरेंट खोला। जिसमें वो मंडुवे और दूसरे पहाड़ी अनाजों का इस्तेमाल कर नए-नए फूड आइटम्स बनाने लगे। लोगों ने भी इन्हें हाथों हाथ लिया। इस तरह जसवीर ने अपनी सोच और मेहनत से न सिर्फ पहाड़ी उत्पादों को एक शानदार मंच दिया, बल्कि गांव के सात युवाओं को रोजगार से भी जोड़ा। उनके इस स्टार्टअप ने कई और युवाओं को स्वरोजगार की राह दिखाई है।