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90% ट्रेकर्स नहीं जानते केदार हिमालय के ये सीक्रेट रूट्स
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
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देहरादून: कोरोना अपने साथ महंगाई, गरीबी और बेरोजगारी भी लेकर आया। लॉकडाउन के साथ ही सरकारी विभागों की भर्तियों पर लॉक लग गया। फैक्टियों-उद्योगों पर ताले लगे तो लाखों लोग बेरोजगार हो गए। अपने प्रदेश में भी रोजगार के नाम पर बेरोजगारों के साथ जमकर धोखा हुआ। चुनाव के दौरान नेता बेरोजगारों को रोजगार दिलाने और पलायन रोकने की बातें करते रहे, लेकिन सच ये है कि यहां पिछले पांच सालों में केवल दो फीसदी लोगों को ही रोजगार मिल सका है। स्थिति बेहद विकट है। सेवायोजन विभाग भी बेरोजगारों को रोजगार दिलाने में फिसड्डी साबित हुआ। विभाग की भूमिका सिर्फ बेरोजगारों के रजिस्ट्रेशन तक सिमट कर रह गई। हैरानी इस बात की है कि जगह-जगह रोजगार मेले होने के बाद भी पांच साल में सिर्फ दो फीसदी पंजीकृत बेरोजगारों को ही काम मिल सका है। एक न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक सेवायोजन विभाग के अनुसार प्रदेश में करीब आठ लाख बेरोजगार रजिस्टर्ड हैं। बेरोजगारों को रोजगार से जोड़ने के लिए सेवायोजन विभाग की ओर से हर साल रोजगार मेलों का आयोजन किया जाता है। आगे पढ़िए