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ये ट्रेक्स गूगल मैप पर भी नहीं मिलेंगे! केदार हिमालय के छुपे हुए रास्ते
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
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उधमसिंह नगर: वीरभूमि उत्तराखंड एक बार फिर शोक में डूबी है। पहाड़ के एक और जांबाज ने देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया। ऊधमसिंहनगर के खटीमा निवासी हवलदार हयात सिंह महर अब हमारे बीच नहीं रहे। 48 साल के हवलदार हयात सिंह महर पुत्र स्व. त्रिलोक सिंह का 12 जुलाई को मणिपुर में उल्फा उग्रवादियों ने अपहरण कर लिया था। 16 जुलाई को उनका क्षत-विक्षत शव मिला। हवलदार हयात सिंह महर आसाम राइफल्स में तैनात थे। बुधवार को शहीद का पार्थिव शरीर उनके निवास स्थान झनकट पहुंचा तो परिजन बदहवास हो गए। हर तरफ चीत्कार और रोने की आवाजें सुनाई देने लगीं। शहीद का अंतिम संस्कार सैन्य सम्मान के साथ बनबसा, शारदा घाट पर किया गया। उनके निधन से क्षेत्र में शोक की लहर है। शहीद हवलदार महर अपने पीछे पत्नी चंद्रा महर, पुत्री रेखा (21) व पुत्र अमित सिंह महर (18) को रोता बिलखता छोड़ गए हैं। शहीद की पुत्री रेखा बीएससी व पुत्र अमित बीटेक की पढ़ाई कर रहे है।