रोड बने 7 साल हो गए, लेकिन ग्रामीणों को अब तक मुआवजा नहीं मिला।
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Komal Negi
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Image: People hostage ae and je in uttarkashi
उत्तरकाशी: उत्तरकाशी में सड़क निर्माण की जद में आए खेतों का मुआवजा न मिलने से गुस्साए ग्रामीणों ने एई और जेई को बंधक बना लिया। ग्रामीणों ने पीएमजीएसवाई दफ्तर में हंगामा भी किया। साथ ही कहा कि जब तक मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। दफ्तर में प्रदर्शन करने के लिए ग्रामीण खाली बोरियां लेकर पहुंचे थे। उन्होंने पीएमजीएसवाई के अधिकारियों से अनाज के साथ सड़क निर्माण के लिए काटे गए खेतों का प्रतिकर देने की मांग की। मामला साल्ड और ज्ञाणजा गांव से जुड़ा है। यहां ज्ञानसू-ज्ञाणजा मोटर मार्ग के निर्माण के लिए पीएमजीएसवाई ने ग्रामीणों के खेतों का इस्तेमाल किया। खेतों के बदले ग्रामीणों को मुआवजा देने की बात कही गई थी, लेकिन 7 साल बीत जाने के बाद भी ग्रामीणों को मुआवजा नहीं मिला। अधिकारी उन्हें बार-बार टरका रहे थे। कई बार शिकायत करने के बाद भी जब अधिकारियों के कान पर जूं नहीं रेंगी तो बुधवार को साल्ड और ज्ञाणजा गांव के लोग कंसेण स्थित पीएमजीएसवाई के दफ्तर पहुंच गए।
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वहां अधिशासी अभियंता नहीं मिले तो ग्रामीण भड़क गए। उन्होंने दफ्तर में बैठे सहायक अभियंता और अवर अभियंता को दफ्तर में ही बंद कर दिया। करीब 20 मिनट तक दोनों अधिकारी दफ्तर में बंद रहे, जबकि ग्रामीण ढोल-नगाड़ों के साथ दफ्तर के बाहर प्रदर्शन करते रहे। ग्रामीणों ने बताया कि ज्ञानसू-ज्ञाणजा मोटरमार्ग का निर्माण साल 2014-15 में हुआ था। उस वक्त साल्ड और ज्ञाणजा गांव के 100 से ज्यादा परिवारों की खेती की भूमि को सड़क बनाने के लिए काटा गया। रोड बने सात साल हो गए, लेकिन ग्रामीणों न तो फसल दबान की धनराशि मिली, न ही जमीन का मुआवजा मिला। कई परिवार तो ऐसे हैं, जिनके पास सिर्फ वही कृषि भूमि थी, जो सड़क बनाने में चली गई। उनके सामने अनाज और आर्थिक संकट पैदा हो गया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि अगर सड़क के कटान का मुआवजा 10 सितंबर तक नहीं मिला तो वो उग्र आंदोलन करेंगे। वहीं पीएमजीएसवाई के अधीक्षण अभियंता ने ग्रामीणों को दो महीने के भीतर मुआवजे की राशि देने का आश्वासन दिया है।