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ये ट्रेक्स गूगल मैप पर भी नहीं मिलेंगे! केदार हिमालय के छुपे हुए रास्ते
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
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रुद्रप्रयाग: ‘यकुलांस’ यानि अकेला होना। अकेले होने का दर्द क्या होता है, ये जानना हो तो उत्तराखंड के खाली होते गांवों में एक चक्कर लगा आइए। कभी हंसी-ठिठोली से गूंजते इन गांवों में अब खौफनाक सन्नाटा पसरा है। रोजी-रोटी की तलाश में गांव के जवान शहरों में चले गए। खाली पड़े मकानों में अब दरख्त उग आए हैं, हर तरफ एक डराने वाली खामोशी पसरी है। पांडवाज प्रोडक्शन की शॉर्ट फिल्म ‘यकुलांस-द घोस्ट ऑफ विलेज’ उत्तराखंड की इसी हकीकत को बयां करती है। बीते एक दशक के भीतर उत्तराखंड से पांच लाख से ज्यादा लोग पलायन कर गए हैं। जिससे पहाड़ में बसे 3,946 गांव घोस्ट विलेज बनकर रह गए हैं। यकुलांस इन्हीं गांवों में रह रहे एक बुजुर्ग शख्स की कहानी है। जो अकेलेपन में जीता हुआ अपने मवेशियों से बातें करता नजर आता है। पांडवाज प्रोडक्शन को उनके शानदार काम के लिए जाना जाता है। यकुलांस से भी ऐसी ही ढेरों उम्मीदें हैं। आगे पढ़िए