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पौड़ी गढ़वाल: पलायन उत्तराखंड की सबसे बड़ी विडंबना है। पलायन न होता तो उत्तराखंड की सूरत शायद कुछ और होती। गांव के गांव खाली हो रहे हैं। बचा है तो केवल सूनापन। उत्तराखंड के अधिकांश गांव पलायन का शिकार हो गए हैं, यह बात हम सब अच्छी तरह जानते हैं। यह बात सत्ताधारी लोग भी जानते हैं जिनके लिए पलायन वैसे तो सबसे गंभीर मुद्दा है मगर इसकी ओर कोई भी कदम उठाना नहीं चाहता। बात करें पौड़ी जिले की तो पौड़ी जिला पलायन के मामले में सबसे पहले नंबर पर आता है। आश्चर्य की बात तो यह है की पौड़ी जिले के कई दिग्गज केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार की बड़ी-बड़ी पोस्ट पर विराजमान हैं मगर इसके बावजूद भी कोई पौड़ी गढ़वाल से पलायन का खात्मा नहीं कर पाया है। हालात कुछ इस कदर पैदा हो रहे हैं कि कई गांव में उंगलियों पर गिने जाने लायक व्यक्ति ही बचे हुए हैं। पौड़ी गढ़वाल के हिस्से पलायन के अलावा के कुछ नहीं आया है। कई गांव में एक एवं दो परिवार बच गए हैं तो कई गांव या तो युवा विहीन हो चले हैं या फिर पुरुष विहीन हो गए हैं। आज हम आपको पौड़ी गढ़वाल के एक ऐसे ही गांव के बारे में बताने जा रहे हैं जहां पर केवल तीन बुजुर्ग महिला रह गई हैं। गांव सूना पड़ गया है। आगे पढ़िए