उत्तराखंड: ऐतिहासिक पर्यटन स्थल को बदरंग कर रहे हैं ज़ाहिल लोग, कार्रवाई के निर्देश जारी

गरतांग गली के खुलने से कुछ लोग बेहद खुश हुए तो वहीं कुछ लोग ऐसे भी थे जो यहां घूमते वक्त अपनी जाहिली का नमूना पीछे छोड़ गए। ऐसे लोगों को अब खूब सबक सिखाया जाएगा।
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Gartang Gali Uttarakhand: Tourists are polluting Gartang street
Image: Tourists are polluting Gartang street

उत्तरकाशी: उत्तरकाशी की गरतांग गली। प्राचीन इंजीनियरिंग का नायाब नमूना। सदियों पहले बने इस रास्ते से कभी भारत-तिब्बत के बीच व्यापार हुआ करता था। भारत-चीन युद्ध के बाद ये रास्ता बंद हो गया। दशकों तक ये रास्ता बंद ही रहा। कुछ समय पहले इसकी मरम्मत हुई, और गरतांग गली को पर्यटकों की आवाजाही के लिए खोल दिया गया। इससे कुछ लोग बेहद खुश हुए तो वहीं कुछ लोग ऐसे भी थे जो यहां घूमते वक्त अपनी जाहिली का नमूना भी पीछे छोड़ गए। इन्होंने सीढ़ियों से लेकर रेलिंग तक अपने नाम कुरेद कर इतिहास के इस खजाने को बदरंग कर दिया। सोशल मीडिया पर इन लोगों की कारस्तानी के नमूने वायरल हुए तो पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज भी एक्शन में आ गए। उन्होंने ऐतिहासिक गरतांग गली की सीढ़ियों को बदरंग करने के मामले में डीएम मयूर दीक्षित से बात की। साथ ही गरतांग गली को बदरंग करने वाले लोगों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश भी दिए।

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इसके अलावा अब गरतांग गली में सुरक्षा के मद्देनजर कर्मचारी भी तैनात किए जाएंगे। यहां आपको गरतांग गली का इतिहास भी बताते हैं। 17वीं शताब्दी (लगभग 300 साल पहले) पेशावर के पठानों ने 11 हजार फीट की ऊंचाई पर दुनिया का सबसे खतरनाक रास्ता तैयार किया था, जिसे आज हम गरतांग गली के नाम से जानते हैं। करीब 150 मीटर लंबी लकड़ी से तैयार यह सीढ़ीनुमा गरतांग गली भारत-तिब्बत व्यापार की साक्षी रही है। लोक निर्माण विभाग ने बीते अप्रैल महीने में करीब 64 लाख की लागत से गरतांग गली का पुनर्निर्माण का कार्य शुरू किया। जिसके बाद इसे पर्यटकों के लिए खोल दिया गया। बीते दो हफ्ते में यहां 350 से ज्यादा पर्यटक पहुंच चुके हैं, लेकिन कुछ बिगड़ैल पर्यटक ऐतिहासिक सीढ़ियों को बदरंग करने पर तुले हैं। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम मयूर दीक्षित को ऐसा करने वालों की पहचान करने और उनके खिलाफ कड़ा एक्शन लेने के निर्देश दिए हैं।