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जहां आज भी सिर्फ चरवाहे जाते हैं – केदार हिमालय के अनदेखे ट्रेक्स
प्रकृति, शांति और हिमालय – केदार के गुप्त ट्रेक्स.. यहां कदम रखते ही बदल जाती है सांस और सोच – Hidden Kedar Trails
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अल्मोड़ा: उत्तराखंड की सबसे बड़ी दुविधा रही है पलायन जो कि तेजी से उत्तराखंड के खुशहाल गांवों को निगल रहा है। इस वक्त जिस चीज की सबसे अधिक जरूरत है वह है उन लोगों की जिनके अंदर वापस से बंजर पड़ी जमीन को आबाद कर सकने और उनको जीवनदान दे सकने का जज्बा मौजूद हो। जी हां, जहां एक ओर उत्तराखंड के कई युवा बाहर नौकरी की तलाश में जाते हैं तो वहीं कुछ युवा दृढ़ निश्चय के साथ में अपने ही गांव में ही खेती कर कामयाबी की मिसाल पेश करते हुए यह साबित करते हैं कि पैसा कमाने के लिए अपनी मिट्टी और अपने लोगों को छोड़ने की जरूरत नहीं है। आज हम आपको उत्तराखंड के एक ऐसे ही महत्वकांक्षी और प्रगतिशील कृषक के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने उत्तराखंड में सफलतापूर्वक खेती कर यह साबित किया है कि अगर मन में कुछ ठान लो तो आवश्यक रूप से ही सफलता आपके कदम चूमती है। इन्होंने उत्तराखंड में अनेकों प्रवासियों के लिए कृषि एवं बागवानी के क्षेत्र में रोजगार सृजन कर मिसाल कायम की है। यह नाम उत्तराखंड के कुछ चुनिंदा सफल नामों में से है जो अपनी मिट्टी, अपने पहाड़ों में रहकर खेती का व्यवसाय कर रहे हैं। हम बात कर रहे हैं अल्मोड़ा के रानीखेत के निवासी गोपाल दत्त उप्रेती की जिन्होंने अपने खेत में 20,000 ब्रोकली के पौधों का रोपण किया है। जी हां, गोपाल दत्त कुकरेती ने 20,000 ब्रोकली के पौधों का रोपण कर अल्मोड़ा जिले का नाम रोशन किया है।आगे पढ़िए