उत्तराखंड को वैज्ञानिकों ने दिया बड़े खतरे का संकेत, तबाही मचा सकता है जबरदस्त भूस्खलन

बारिश से मची तबाही के बाद अब बढ़ा भूस्खलन का खतरा, वैज्ञानिकों ने दिए खतरे के संकेत
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Landslide alert uttarakhand : Landslide alert in uttarakhand scientists report
Image: Landslide alert in uttarakhand scientists report

चमोली: उत्तराखंड में बीते दिनों भारी तबाही हुई। कई लोगों की मौत के बाद अब वैज्ञानिकों द्वारा एक बुरी खबर सामने आ रही है। बारिश का दौर थमने के बाद अब पहाड़ों पर जबरदस्त भूस्खलन का खतरा मंडरा रहा है। जी हां, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिकों के अनुसार बारिश रुकने के बाद भूस्खलन का खतरा बरकरार रहता है। ऐसे में वैज्ञानिकों द्वारा यह आशंका जताई जा रही है कि उत्तराखंड में बरसात का दौर थमने के बाद और पहाड़ी इलाकों पर जबरदस्त भूस्खलन हो सकता है। उत्तराखंड में भूस्खलन का खतरा देखते हुए वैज्ञानिकों ने कहा है कि आपदा प्रबंधन से जुड़ी एजेंसियों को थोड़ा अलर्ट रहने की जरूरत है। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विक्रम गुप्ता के अनुसार उत्तराखंड भूस्खलन के लिहाज से बेहद संवेदनशील राज्यों में से एक है और यहां पर भूस्खलन की घटनाएं आम हैं मगर बरसात के समय भूस्खलन का खतरा कई गुना अधिक बढ़ जाता है।

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बीते 3 दिनों में उत्तराखंड में जबरदस्त बरसात हुई है। खासकर की कुमाऊं मंडल में तो रिकॉर्ड तोड़ बारिश हुई है। ऐसे में कुमाऊं मंडल में भूस्खलन का खतरा बेहद बढ़ चुका है। आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार पूरे राज्य में 84 इलाके भूस्खलन के लिहाज से संवेदनशील हैं और यहां पर अधिक अलर्ट रहने की जरूरत है। इसके अलावा सैकड़ों इलाके भी संवेदनशील जोन में शामिल हैं। ऋषिकेश से लेकर बदरीनाथ हाईवे और गंगोत्री हाईवे पर ऑलवेदर रोड के 150 किलोमीटर के क्षेत्र में 60 ऐसे जोन हैं जो भूस्खलन के लिहाज से संवेदनशील हैं। पौड़ी में 119, चंपावत में 15, बागेश्वर में 18, पिथौरागढ़ में 17 जोन हैं जो भूस्खलन के लिहाज से संवेदनशील हैं।