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उत्तरकाशी: क्या आप जानते हैं कि गंगोत्री विधानसभा सीट (Gangotri vidhan sabha seat myth) से एक बेहद ही दिलचस्प मिथक जुड़ा हुआ है। ऐसा कहा जाता है कि जो भी प्रत्याशी गंगोत्री सीट से चुनाव जीत जाता है वही पार्टी सत्ता में आती है और उसी पार्टी की सरकार बनती है। यह मिथक 70 सालों से बरकरार है और इसको अभी तक कोई भी नहीं तोड़ पाया है। अब इस मिथक को मात्र एक संयोग कहें या फिर कुछ और मगर यह सच है कि देश के आजाद होने के बाद इस मिथक की शुरुआत हुई जो कि अब तक नहीं टूटा है और लगातार चलता रहा है। इस बात को तकरीबन 70 साल हो गए हैं और अब भी यह मिथक बरकरार है। बता दें कि उत्तराखंड राज्य गठन से पहले भी गंगोत्री विधानसभा सीट (जो कि उत्तरकाशी विधानसभा सीट हुआ करती थी) पर जो भी प्रत्याशी चुनाव जीतता था उसी पार्टी की सरकार बनती थी और वही पार्टी सत्ता में आती थी। इस मिथक के होने का सिलसिला अब भी जारी है। बता दें कि उत्तर प्रदेश में पहली बार 1982 में विधानसभा चुनाव हुए थे और तब गंगोत्री उत्तरकाशी विधानसभा सीट का हिस्सा थी और इस सीट से जयेंद्र सिंह बिष्ट ने निर्दलीय चुनाव लड़े थे और उसके बाद चुनाव जीतकर वे कांग्रेस में शामिल हो गए थे। 1952 में कांग्रेस की सरकार बनी थी। बता दें कि 1993 में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला जब उत्तरकाशी विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी बर्फीया लाल चुनाव जीते थे। उस समय भारतीय जनता पार्टी को सबसे अधिक वोट मिले मगर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी ने मिलकर यूपी में पार्टी बनाई।
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