उत्तराखंड: अपने नाबालिग बच्चे को वाहन न दें, वरना पुलिस करेगी आपसे बात

अब अगर दोपहिया वाहन चलाते हुए पकड़ा गया नाबालिग, तो पुलिस पकड़ेगी नाबालिग के माता-पिता को, होगी काउंसलिंग-
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uttarakhand traffic rule: Do not give vehicle to your minor child or else the police will talk to you
Image: Do not give vehicle to your minor child or else the police will talk to you

देहरादून: कितने ही नाबालिग बच्चों को हम अक्सर स्कूटी और बाइक सड़कों पर चलाते हुए देखते हैं। आए दिन नाबालिक बच्चे लापरवाही में दुपहिया वाहन चलाते हुए सड़क हादसों का शिकार होते हैं और कई बार तो स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि कई नाबालिगों की दुर्घटना में मृत्यु भी हो जाती है। मगर हम अगर गौर से देखें तो गलती बच्चों की नहीं बल्कि उनके मां-बाप की होती है। बच्चे थोड़े बड़े होते नहीं हैं कि उनके मां-बाप उनको स्कूटी और बाइक की चाबी पकड़ा देते हैं। ऐसे में बच्चों से ज्यादा गलती उनकी मां बाप की होती है कि वे अपने बच्चों पर अंकुश नहीं लगाते और बेहद कम उम्र में उनको स्कूटी या फिर बाइक चलाने की परमिशन दे देते हैं। अपने मां-बाप द्वारा छूट मिलने के बाद नाबालिग बच्चे सड़कों पर खुलेआम लापरवाही के साथ दुपहिया वाहन चलाते हैं और दुर्घटना का शिकार होते हैं।

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इसी गंभीर समस्या को मध्य नजर रखते हुए पिथौरागढ़ में पुलिस द्वारा अभियान चलाया जा रहा है। पिथौरागढ़ में अब अगर कोई भी नाबालिक बच्चा दुपहिया वाहन चलाता हुआ नजर आया तो उसका वाहन सीज कर लिया जाएगा और बच्चों के अभिभावकों को पुलिस काउंसलिंग से गुजरना होगा। काउंसलिंग के बाद ही वाहन को अवमुक्त करने की कार्यवाही की जाएगी। पिथौरागढ़ जिले में नाबालिकों द्वारा की जा रही वाहन दुर्घटनाओं को मध्य नजर रखते हुए पुलिस ने नाबालिग वाहन चालकों के खिलाफ विशेष अभियान चला रखा है और पिथौरागढ़ पुलिस ने 3 दिन में 200 से अधिक नाबालिक वाहन चालकों को वाहन चलाते हुए पकड़ लिया है। बीते गुरुवार को पुलिस ने जिले में 30 नाबालिगों को वाहन चलाते हुए पकड़ा और सभी के वाहन सीज कर ले गए हैं। पुलिस का कहना है कि सभी नाबालिक बच्चों को वाहन पकड़ाने वाले अभिभावकों की थाना क्षेत्र में काउंसिलिंग कराई जाएगी और काउंसलिंग कराने के बाद ही सीज किए गए वाहन मुक्त होंगे। पिथौरागढ़ पुलिस के सराहनीय अभियान का असर जिले में दिखना शुरू हो चुका है। सड़कों पर दुपहिया वाहन चालकों की संख्या कम हो गई है और ओवरस्पीड वाहन के मामले भी बेहद कम आ रहे हैं।