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ऋषियों का मार्ग: केदार हिमालय के इन ट्रेक्स पर शोर नहीं, सिर्फ मंत्र सुनाई देते हैं
प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।
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देहरादून: कितने ही नाबालिग बच्चों को हम अक्सर स्कूटी और बाइक सड़कों पर चलाते हुए देखते हैं। आए दिन नाबालिक बच्चे लापरवाही में दुपहिया वाहन चलाते हुए सड़क हादसों का शिकार होते हैं और कई बार तो स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि कई नाबालिगों की दुर्घटना में मृत्यु भी हो जाती है। मगर हम अगर गौर से देखें तो गलती बच्चों की नहीं बल्कि उनके मां-बाप की होती है। बच्चे थोड़े बड़े होते नहीं हैं कि उनके मां-बाप उनको स्कूटी और बाइक की चाबी पकड़ा देते हैं। ऐसे में बच्चों से ज्यादा गलती उनकी मां बाप की होती है कि वे अपने बच्चों पर अंकुश नहीं लगाते और बेहद कम उम्र में उनको स्कूटी या फिर बाइक चलाने की परमिशन दे देते हैं। अपने मां-बाप द्वारा छूट मिलने के बाद नाबालिग बच्चे सड़कों पर खुलेआम लापरवाही के साथ दुपहिया वाहन चलाते हैं और दुर्घटना का शिकार होते हैं।