खुशखबरी: उत्तराखंड के 3 पुलों का हुआ उद्घाटन, BRO के जवानों की कड़ी मेहनत को सलाम

उत्तराखंड में बीआरओ द्वारा निर्मित तीन पुलों का उद्घाटन हो गया है। रक्षा मंत्री ने इसके लिए बीआरओ के जवानों को बधाई दी है। पढ़िए...
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BRO 3 New Bridges: Salute to BRO for 3 New Bridges are ready to Use in Uttarakhand
Image: Salute to BRO for 3 New Bridges are ready to Use in Uttarakhand

चमोली: केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश के 4 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में बीआरओ द्वारा निर्मित 24 पुल और 3 सड़कों का वर्चुअल लोकार्पण किया। इनमें उत्तराखण्ड में तीन पुल शामिल हैं। उत्तराखंड में तवाघाट- घतिया बगड़ को जोड़ने वाला घस्कू पुल, जौलजीबी मुनस्यारी को जोड़ने वाले गौरी गाढ पुल, सेमली ग्वालदम को जोड़ने वाला बदामगढ़ पुल का उद्घाटन किया गया।

Thanks to BRO, 3 New Bridges are ready to Use:

उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी कार्यक्रम में वर्चुअल प्रतिभाग किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बधाई देते हुए कहा कि बीआरओ की सड़कें, टनल और पुलों ने आज स्थानों के बीच की दूरी और समय बहुत कम कर दिया है। यानि सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़े लोग दिल के पास तो हैं ही, दिल्ली के पास भी हैं। बीआरओ भी इसमें अपना योगदान दे रहा है। दूरदराज और सीमावर्ती इलाकों में सड़क, टनल, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण कर राष्ट्र की प्रगति में बीआरओ महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर रहा है।

शून्य से नीचे के तापमान और अत्यधिक ऊंचाई की अनेक चुनौतियों के बावजूद बीआरओ कार्मिकों के धैर्य, दृढ़ संकल्प और कर्मठता ने ऐतिहासिक काम कर दिखाया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कें न केवल सामरिक जरूरतों के लिये होती हैं, बल्कि राष्ट्र के विकास में, दूरदराज के क्षेत्रों की भी बराबर भागीदारी सुनिश्चित करती हैं। इस तरह ये पुल, सड़कें और सुरंगें हमारी सुरक्षा और सम्पूर्ण राष्ट्र को सशक्त करने में अपनी अहम भूमिका निभाती हैं। आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत देश के सीमावर्ती क्षेत्रों के 75 स्थानों पर बीआरओ कैफे स्थापित किये जाएंगे।
इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि बीआरओ द्वारा निर्मित सङकें और पुल प्रधानमंत्री मोदी जी के आत्म निर्भर भारत के विजन को पूरा करते हैं। उन्होंने कहा उत्तराखण्ड और यहाँ के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को इसका लाभ मिलेगा। उत्तराखण्ड के सीमांत क्षेत्रों के विकास में बीआरओ की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।