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हरिद्वार: हिंदी सिर्फ भाषा ही नहीं हमारी सांस्कृतिक पहचान है. हिंदी भाषा को वर्तमान में प्रचार और प्रसार की बेहद जरूरत है और इसी ओर उत्तराखंड के कई लोग जी-जान से जुटे हुए हैं और हिंदी भाषा को अलग पहचान दिलाने के प्रयास कर रहे हैं. कई लोगों के लिए हिंदी महज विषय नहीं बल्कि एक पहचान भी है. हिंदी भाषा को हीन भावना से देखने वालों के बीच में कई ऐसे लोग हैं जिन्होंने हिंदी बोलने और पढ़ने के ऊपर काफी अधिक जोर दिया है. इस बीच उत्तराखंड से बेहद अच्छी खबर सामने आ रही. हिंदी साहित्य के क्षेत्र में विशिष्ट कार्य करने के लिए हरिद्वार की रहने वाली डा.मीनू पाराशर को साहित्य गौरव पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. बता दें की संस्कृति युवा संस्था द्वारा हाल ही में भारतीय गौरव पुरस्कार के लिए विश्व के 28 प्रतिभागी चयनित किए गए, जिनमें हरिद्वार की डॉ. मीनू पाराशर का नाम भी सम्मिलित था. यह आयोजन दुबई के प्रसिद्ध अटलांटिस होटल, द पाम में 23 दिसंबर को पूरी भव्यता के साथ संपन्न हुआ.
जहाँ लंबे समय से हिंदी साहित्य के क्षेत्र में सृजनात्मक कार्य करने के लिए डॉ. मीनू पाराशर को साहित्य गौरव पुरस्कार से सम्मानित किया गया. आपको बता दें की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपने योगदान से देश का नाम रोशन करने वाले प्रतिभावान नागरिकों को संस्कृति युवा संस्था द्वारा प्रति वर्ष भारतीय गौरव पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है. एक तरफ जहां लोग विदेश जाकर अपनी मातृभाषा को बोलने से कतराते हैं वहीं डॉ मीनू ने हिंदी भाषा में न सिर्फ लगातार सृजन किया है बल्कि अपने क्षेत्र में हिंदी भाषा का कई वर्षों से प्रचार प्रसार भी किया है. डॉ. मीनू एक हिंदी प्राध्यापिका एवं वक्ता के रूप में भी हिंदी भाषा से लम्बे समय से जुड़ी रही हैं. चाहे वह अंतरराष्ट्रीय काव्य प्रेमी मंच से उत्तराखंड की महिमा का बखान चौपाइयों द्वारा करना हो, या अंतर्राष्ट्रीय शब्द सृजन संस्थान द्वारा भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से विभूषित प्रसिद्ध सितार वादक पंडित रविशंकर पर सृजन करना हो. हर जगह मीनू की लेखनी निरंतर अग्रसरित होती रही है. राज्य समीक्षा टीम की तरफ से डा.मीनू पाराशर को उनकी इस उपलब्धि के लिए हार्दिक शुभकामनाएं.