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अल्मोड़ा: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में अब भी विकास का आगमन नहीं हुआ है। कहीं सड़कों को अधूरा छोड़ दिया गया है तो कहीं पर कटान अधूरी छोड़ दी गई है। ग्रामीण सैकड़ों चक्कर मारते हैं तब जाकर उनकी बात सुनी जाती है। जहां सड़क बनती भी है वो भी बस हाल तोड़ने के लिए बनाई जाती है। मोटा पैसा लगा दिया जाता है मगर कुछ ही दिनों में सड़कों का हाल दोबारा वैसा हो जाता है। अल्मोड़ा के रानीखेत के सल्ट ब्लाक में पैंसिया पिपना आंतरिक रोड़ के भी कुछ ऐसे ही हाल हैं। यहां आलम यह है कि 11 किमी के दायरे में गड्ढे भरने को लेकर पांच लाख रुपये बर्बाद कर दिए हैं। या यूं कहें कि बस हाल तोड़े गए हैं क्योंकि डामर सप्ताहभर भी नहीं टिक सका। इस बात से ग्रामीणों के बीच में आक्रोश साफ देखने को मिल रहा है। लोनिवि ने ठेकेदार को नोटिस भेज दिया है। दरअसल रानीखेत विकासखंड के सुदूर गांवों को जोड़ने वाली पैंसिया पिपना आंतरिक सड़क का हाल बदहाल चल रहा था। ग्रामीणों द्वारा लगातार आंदोलन की चेतावनी देने के बाद आखिरकार लोनिवि हरकत में आई और लोनिवि ने पेचवर्क करा सड़क के गड्ढे भरे। इसके लिए बकायदा पांच लाख रुपये का बजट भी खर्च किया गया। मगर 5 लाख के बजट के बावजूद भी विभाग द्वारा प्रधान संगठन के ब्लाक उपाध्यक्ष चंद्रप्रकाश शर्मा का आरोप है कि गुणवत्ता के साथ भद्दा मजाक किया गया है। आगे पढ़िए
गुणवत्ता के अभाव में डामर सप्ताहभर भी टिक न सका और 1 हफ्ते में ही उखड़ गया। इससे गड्ढे दोबारा बन गए हैं। यह हादसे का सबब भी बन गए हैं। खासतौर पर रात में कई दोपहिया वाहन सवार गड्ढों की वजह से चोटिल हो चुके हैं। दो दिन पूर्व ही क्षेत्र में हल्की बारिश में ही इन गड्ढों ने मुश्किल और बढ़ा दी है। ग्राम प्रधान संगठन ब्लाक उपाध्यक्ष चंद्रप्रकाश शर्मा ने कहा कि क्षेत्र में सड़कों की सुध नहीं ली जा रही है। आंदोलन की चेतावनी देने के बाद सड़क बनाई मगर एक हफ्ते में ही वह उखड़ गई। मोटा बजट पानी की तरह बहाने के बावजूद हालात नहीं सुधर रहे। उन्होंने कहा कि यदि जल्द पैंसिया पिपना रोड की हालत न सुधारी गई तो चुनाव के बाद आंदोलन किया जाएगा। वहीं लोनिवि के सहायक अभियंता सतनाम सिंह ने कहा है कि लापरवाही के लिए हमने ठेकेदार को नोटिस भेज दोबारा पेचवर्क के निर्देश दिए हैं। रोड को पुन: मरम्मत के लिए प्रस्तावित किया है। फंड मिलते ही गड्ढे भर दिए जाएंगे। अभी ठंड की वजह से मरम्मत कार्य नहीं हो पाएगा। यह मरम्मत कार्य तापमान ठीक होने पर फरवरी मध्य बाद ही किया जाएगा।