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Hidden Gem Treks of Kedar Himalaya You Must Explore Once in Life
Peaceful and untouched trekking routes away from the crowds. Hidden trails where nature still remains raw and pure.
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देहरादून: पुलवामा हमले की कड़वी यादें आज भी भुलाए नहीं भूलतीं। इस हमले में उत्तराखंड ने पहले अपने दो जांबाज गंवाए। उसके बाद भी बुरी खबरों के आने का सिलसिला लगातार जारी रहा। 18 फरवरी 2019 को जैश ए मोहम्मद के खिलाफ चले ऑपरेशन में देहरादून के रहने वाले मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल शहीद हो गए। पांच आतंकवादियों को मौत के घाट उतारने वाले मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल को मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। शहीद मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल आज देश के हीरो हैं। मेजर विभूति ढौंडियाल का परिवार मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल के बैजरों के पास स्थित ढौंड गांव का रहने वाला है। उनका परिवार 1952 में देहरादून में बस गया था। विभूति के पिता और दादा दोनों ही राजपुर रोड स्थित एयरफोर्स के सीडीए कार्यालय से सेवानिवृत्त हुए थे। तीन बहनों में सबसे छोटे 34 साल के मेजर विभूति शादी के महज 10 महीने बाद ही देश के लिए लड़ते हुए शहीद हो गए थे। यहां पर हम उनकी पत्नी वीरांगना नीतिका कौल की बात भी करना चाहेंगे। जिन्होंने शादी के सिर्फ 10 महीने बाद ही पति को खो दिया, पर विकट हालात में भी अपनी हिम्मत बनाए रखी। खुद को टूटने नहीं दिया। मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल की शहादत के बाद उनकी पत्नी नीतिका कौल के साथ उनकी आखिरी मुलाकात ने सभी की आंखें नम कर दी थीं। आज नीतिका सेना में अफसर हैं। पुलवामा आतंकी हमले में पति के शहीद होने के बाद नीतिका ने संकल्प लिया था कि वह भी पति की तरह सेना में भर्ती होंगी। पिछले साल मई में नीतिका का यह संकल्प पूरा हो गया। ओटीए चेन्नई में पासिंग आउट परेड के बाद वह बतौर लेफ्टिनेंट सेना में शामिल हो गईं।