गढ़वाल के वीरेन्द्र नेगी: शहर छोड़ गांव लौटे, स्मार्ट खेती से कमाया मुनाफा..दिल्ली में मिलेगा अवॉर्ड

Pauri Garhwal के farmer Virendra Singh Negi करते हैं स्मार्ट वर्क, तकनीकी खेती को बढ़ावा देने कृषि अनुसंधान पूसा नई दिल्ली में अवार्ड के लिए हुआ चयन
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प्रकृति से जुड़ने और आत्मिक शांति पाने का अवसर। केदार हिमालय की वो यात्राएं जो ज़िंदगी भर याद रहती हैं।

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Pauri Garhwal Virendra Singh Negi: Story of Virendra Singh Negi farmer of Pauri Garhwal
Image: Story of Virendra Singh Negi farmer of Pauri Garhwal

पौड़ी गढ़वाल: उत्तराखंड में स्वरोजगार की तरफ सैकड़ों युवा अग्रसर हो रहे हैं। स्वरोजगार अपनाकर ना केवल पलायन जैसी बड़ी और गंभीर समस्या समाप्त हो सकती है बल्कि युवाओं के बीच आत्मविश्वास भी बढ़ता है और युवा कुछ नया करने के लिए प्रेरित होते हैं। युवा नौकरी और रोजगार की तलाश में जहां पहले महानगरों की ओर लगातार रुख कर रहे थे अब वह वापस अपनी मिट्टी से जुड़कर सोना उगा रहे हैं। आज हम आपको उत्तराखंड के Pauri Garhwal के farmer Virendra Singh Negi से मिलवाने जा रहे हैं जो कि वापस उत्तराखंड में लौटकर स्वरोजगार अपनाकर खेती कर रहे हैं। हम बात कर रहे हैं पौड़ी जिले के चौड़तल्ला निवासी विरेंद्र सिंह नेगी की जो अपनी मिट्टी से जुड़कर ही नई तकनीक से खेती कर गजब का मुनाफा कमा रहे हैं और इतना ही नहीं विरेंद्र क्षेत्र के लोगों के लिए प्रेरणा भी बन चुके हैं। विरेंद्र एक प्रगतिशील कृषक हैं जिन्होंने 90 के दशक में अपनी प्राइवेट नौकरी छोड़कर घर आकर परंपरा खेती में जुट जाने का निर्णय लिया। बता दें कि वह हार्ड वर्क नहीं बल्कि स्मार्ट वर्क में विश्वास रखते हैं और यही कारण है कि वह कम मेहनत और लागत में अच्छी खासी सब्जी का उत्पादन कर रहे हैं। 2004 में पौड़ी में कृषि विश्वविद्यालय अस्तित्व में आया, जिसके बाद उनकी कृषि वैज्ञानिक से तकनीक खेती में जिज्ञासा बढ़ने लगी जहां उन्होंने कुछ बारीकियां सीखीं और आज वह सब्जी के साथ में फूलों और मछली पालन पर भी काम कर रहे हैं। बता दें कि वह गेंदा और खीरे की खेती तकनीकी विधि से करते हैं। आगे पढ़िए

वे अब तक 7200 क्विंटल खीरे का उत्पादन कर चुके हैं जबकि 2002 से मछली पालन भी कर रहे हैं वे अब तक 2.50 क्विंटल मछलियां बेच चुके हैं और प्रतिदिन उनके पास 700 से 800 किलो तक की डिमांड आती है। बता दें कि बीते साल उन्होंने धान की खेती भी शुरू की और अब तकनीकी खेती में और इजाफा कर वे पॉलीहाउस लगाने जा रहे हैं। गर्व की बात है कि कृषक विरेंद्र सिंह महज हाई स्कूल पास हैं मगर कृषि विद्यालयों में व्याख्यान के लिए उनको बुलाया जाता है और वह विश्वविद्यालय में बच्चों को सिखाने भी जाते हैं। गुजरात के कृषि विश्वविद्यालय ने वहां पर अध्ययनरत छात्रों की तकनीकी खेती में इजाफा करने के लिए उनको ढाई एकड़ भूमि दे दी है जिसमें वे समय-समय पर उनको खेती का ज्ञान देने के लिए जाते हैं। बता दें Pauri Garhwal के farmer Virendra Singh Negi पंतनगर विश्वविद्यालय से नई तकनीक से खेती करने का अवार्ड भी पा चुके हैं और उनको 7 मार्च को होने वाले कृषि अनुसंधान पूसा ने दिल्ली में भी उत्तराखंड से चयनित किया गया है।