Advertisement
Untouched Trekking Routes in Kedar Himalaya, Uttarakhand
Lesser-known treks offering breathtaking Himalayan views. A perfect blend of adventure, solitude, and spirituality.
Example Ads Media
पिथौरागढ़: सेवा भाव और दूसरों के लिए बिना स्वार्थ कुछ करने का जज्बा ऐसी शक्ति है, जिससे बड़ी से बड़ी समस्या को हल किया जा सकता है। चंपावत की महिला आरक्षी रोशन निशा इसकी जीती जागती मिसाल हैं। मंगलवार को जब चंपावत की पुलिस टीम सूखीढांग-डांडामीडार रोड पर हुए सड़क हादसे में घायल लोगों को रेस्क्यू करने और शवों को खाई से बाहर निकालने में जुटी थी, उस वक्त महिला आरक्षी रोशन निशा भी एक गर्भवती महिला की जान बचाने के लिए रक्तदान कर रही थीं। गर्भवती महिला को बी-प्लस ब्लड ग्रुप की जरूरत थी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इस ग्रुप का ब्लड नहीं था। गर्भवती महिला की जान पर बन आई थी। ऐसे वक्त में महिला पुलिस आरक्षी रोशन निशा देवदूत बनकर आईं और ब्लड डोनेट कर गर्भवती महिला की जान बचाई। घटना मंगलवार की है। देवीधुरा क्षेत्र के ग्राम सिल्यूड़ी में रहने वाली गर्भवती महिला हेमा जोशी को अचानक प्रसव पीड़ा होने लगी। महिला को पाटी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया।
जहां से उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लोहाघाट रेफर कर दिया गया। अस्पताल में प्रसूता ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। इस दौरान महिला की हालत काफी बिगड़ गई थी। प्रसूता को खून की जरूरत थी, लेकिन अस्पताल में बी-प्लस ग्रुप का ब्लड उपलब्ध नहीं था। तब महिला को आनन-फानन में जिला चिकित्सालय चंपावत लाया गया। यहां भी इस ग्रुप का एक यूनिट ब्लड ही मिल पाया, जबकि महिला को दो यूनिट ब्लड की जरूरत थी। महिला के परिजन बेहद परेशान थे, तमाम कोशिशों के बाद भी ब्लड नहीं मिल पा रहा था। ये बात महिला आरक्षी रोशन निशा को पता चली तो वो ब्लड डोनेट करने के लिए तुरंत जिला चिकित्सालय पहुंचीं और रक्तदान कर महिला की जान बचा ली। महिला के स्वजनों ने उनका आभार जताया। क्षेत्र के लोगों ने भी रोशन निशा के काम की सराहना की। महिला आरक्षी रोशन निशा पुलिस अधीक्षक कार्यालय की सीटीएनएस शाखा में तैनात हैं। उन जैसे लोगों की वजह से ही लोगों का इंसानियत पर भरोसा कायम है। उनके काम की सोशल मीडिया पर भी खूब तारीफ हो रही है।