उत्तराखंड आयुष्मान कार्ड योजना में बड़े घोटाले का शक, जवाब देने को तैयार नहीं सरकार

Uttarakhand Ayushman Card Scheme शुरुआत से ही विवादों में घिरी रही है। अब राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण 8 महीने में हुए इलाज व उसके खर्च बताने को भी तैयार नहीं है।
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uttarakhand aayushman yojna scam: Suspicion of big scam in Uttarakhand Ayushman card scheme
Image: Suspicion of big scam in Uttarakhand Ayushman card scheme

देहरादून: उत्तराखंड सरकार की ओर से कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए शुरू की गई गोल्डन कार्ड योजना पर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। सरकार पर आरोप लगते रहे हैं कि गोल्डन कार्ड बनवाने के साथ ही सरकार ने कर्मचारियों के वेतन और पेंशन में से कटौती करनी शुरू कर दी थी, लेकिन उन्हें इलाज की सुविधा नहीं दी।

Suspicion of scam in Uttarakhand Ayushman card scheme

आरटीआई एक्टिविस्ट रविशंकर जोशी ने इस योजना में घोटाले की आशंका तक जताई है। उनके पास इसकी वाजिब वजह भी है। आरटीआई एक्टिविस्ट रविशंकर जोशी का कहना है कि सरकार ने अब तक 429013 कर्मचारियों व पेंशनर्स के कार्ड बनवा लिए हैं, लेकिन प्रीमियम व कुल जमा राशि की जानकारी सरकार नहीं दे रही। उत्तराखंड में कर्मचारियों और पेंशनभोगी लोगों के लिए जनकल्याणकारी गोल्डन कार्ड योजना जनवरी 2021 को लागू की गई थी। जिसके लिए प्रत्येक व्यक्ति से 30 रुपये लिए गए। सरकार की यह नीति शुरुआत से ही विवादों में घिरी है। अब राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण 8 महीने में हुए इलाज व उसके खर्च बताने को भी तैयार नहीं है। आगे पढ़िए

आरटीआई एक्टिविस्ट रविशंकर जोशी ने सरकार से प्रीमियम और जमा राशि के साथ कुल कितने लोगों को योजना का लाभ मिला, इसे लेकर राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण से जानकारी मांगी थी, लेकिन प्राधिकरण ने इसकी सूचना होने से साफ इनकार कर दिया। बता दें कि कर्मचारी और पेंशनर्स भी गोल्डन कार्ड नीति को सरकार की मनमानी बताते रहे हैं। उन्होंने इस नियम को वापस लेने की मांग भी की थी, लेकिन किसी ने उनकी मांग नहीं सुनी। इलाज को लेकर भी कर्मचारियों को भ्रम में रखा गया। योजना के लिए देहरादून के अलावा किसी अन्य शहर के अस्पताल को पैनल में शामिल नहीं किया गया। आरटीआई कार्यकर्ता रविशंकर जोशी का कहना है कि सरकार ये बताने को तैयार नहीं है कि अब तक कितने लोगों को योजना का लाभ मिला और इसमें कितना बजट खर्च किया गया। शासन का सूचना न देना संशय पैदा करता है। वहीं इस मामले में राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के अध्यक्ष डीके कोटिया ने कहा कि दरअसल योजना नई है, इसमें धीरे-धीरे काम हो रहा है। हमारे यहां किसी तरह की सूचना को गोपनीय नहीं रखा गया है।