ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे पर तोताघाटी का खूबसूरत लुक देखिए, आखिरकार रंग लाई कड़ी मेहनत

ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे पर तोता घाटी की ये नई तस्वीरें वास्तव में आंखों को सुकून दे रही हैं। आप भी देखिए (फोटो साभार- हरीश भट्ट)
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Lesser-known treks offering breathtaking Himalayan views. A perfect blend of adventure, solitude, and spirituality.

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Rishikesh-Badrinath Highway tota Ghati: Tota Ghati in new look on Rishikesh-Badrinath Highway
Image: Tota Ghati in new look on Rishikesh-Badrinath Highway

ऋषिकेश: आप जब भी ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे से सफर करते होंगे, तो बीच में एक घाटी है..तोता घाटी। तोताघाटी में जिस शख्स ने पहली बार सड़क बनाने का साहस दिखाया था, उनका नाम है ठेकेदार तोता सिंह रांगड़। प्रतापनगर के रहने तोता सिंह ने यहां चट्टान काटने के लिए अपनी सारी जमापूंजी खर्च कर दी थी, पत्नी के जेवर तक बेच दिए थे। उनकी इस जीवटता से खुश होकर टिहरी रियासत के तत्कालीन राजा नरेंद्र शाह ने घाटी का नाम तोताघाटी रखने के आदेश दिए थे। वर्तमान में तोताघाटी में ऑलवेदर रोड का काम चल रहा है। करीब 2 साल तक पसीना बहाने के बाद यहां हाईवे ने खूबसूरत रूप लिया है। मजदूरों की कड़ी मेहनत के बाद ये हाईवे खुल पाया है। अब यहां से जो तस्वीरें सामने आई हैं, वो बेहद खूबसूरत हैं। फेसबुक पर हमें ये तस्वीरें अंकोला पुरोहित की वॉल से मिली हैं, जिन्हें हरीश भट्ट जी द्वारा खींचा गया है। आगे देखिए तस्वीरें और साथ ही जानिए तोता घाटी की कहानी-

  • Rishikesh-Badrinath Highway Tota Ghati new look

    Rishikesh-Badrinath Highway Tota Ghati new look
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    Image: Rishikesh-Badrinath Highway Tota Ghati new look

    तोता सिंह के नाती मेहरबान सिंह रांगड़ बताते हैं कि टिहरी के राजा ने उनके दादा को चांदी के 50 सिक्के देकर सड़क काटने को कहा था। जिसके बाद तोता सिंह 50 ग्रामीण लेकर चट्टान काटने निकल पड़े। इस काम में 70 हजार चांदी के सिक्के खर्च हुए। साल 1931 में काम शुरू हुआ।

  • Rishikesh-Badrinath Highway Tota Ghati new look

    Rishikesh-Badrinath Highway Tota Ghati new look
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    Image: Rishikesh-Badrinath Highway Tota Ghati new look

    1935 में जब सड़क बनकर तैयार हो गई तो दादा ने राजा से कहा कि उन्हें इस काम में भारी नुकसान हुआ है। इस पर राजा नरेंद्र शाह ने उनके दादा को न सिर्फ जमीन दान दी, बल्कि घाटी का नामकरण भी उनके नाम पर कर दिया। राजा ने उनके दादा को लाट साहब की उपाधि दी थी।