अल्मोड़ा, श्रीनगर व दून मेडिकल कालेज से हल्द्वानी में एडमिशन लेने वाले 12 छात्रों ने भी सिर मुंडवाए हुए हैं। जानिए पूरा मामला
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अनुष्का ढौंडियाल
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Image: Ragging in medical colleges of Uttarakhand
हल्द्वानी: कॉलेज लाइफ एक छात्र के कैरेक्टर डेवलपमेंट में बेहद सहायक होती है। कॉलेज जाने के अहसास को शब्दों में बयां करना काफी मुश्किल है। हर छात्र में कॉलेज के पहले दिन को लेकर एक उत्साह होता है। मगर लेकिन इसके साथ ही छात्रों के मन में रैगिंग से जुड़ा एक डर भी होता है। यूं तो रैगिंग एक हेल्दी प्रैक्टिस होती है। रैगिंग को आमतौर पर पुराने छात्रों द्वारा कॉलेज लाइफ में नए छात्रों के स्वागत का दोस्ताना तरीका माना जाता है। एक तरह से इसे नए छात्रों और पुराने छात्रों के बीच की दूरियों को कम करने का प्रयास भी माना जाता है। रैगिंग नए छात्रों को अपने वरिष्ठों (सीनियर्स) के साथ घुलने-मिलने और संवाद कायम करने का मौका देता है। हालांकि बीते कुछ वर्षों में इसकी परिभाषा पूरी तरह से बदल चुकी है। रैगिंग के कई शर्मनाक मामले सामने आए हैं जिनकी वजह से यह मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न के माध्यम के रूप में कुख्यात हो गई है। यही वजह है कि तमाम विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों के अंदर रैगिंग को पूर्ण तरीके से बंद कर दिया गया है।
Ragging in medical colleges of Uttarakhand
इन दिनों उत्तराखंड के कई मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग के शर्मनाक मामले सामने आ चुके हैं। इस बीच खबर आ रही है कि उत्तराखंड के सभी मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग हुई है। हल्द्वानी के साथ ही अल्मोड़ा, श्रीनगर और दून मेडिकल कॉलेज में भी रैगिंग हुई है। यह पूरा प्रकरण शुरू हुआ हल्द्वानी मेडिकल काॅलेज से। यही नहीं प्रशासन ने मान लिया है कि छात्रों ने रूसी व एलर्जी के कारण बाल नहीं मुंडवाए हैं। उनके साथ रैंगिंग हुई है। वहीं अब प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग की बातें सामने आ रही हैं। दरअसल राजकीय मेडिकल कालेज हल्द्वानी में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों के सिर के बाल मुंडवाने का मामला अब भी सुर्खियों में है। वहीं अल्मोड़ा, श्रीनगर व दून मेडिकल कालेज से हल्द्वानी में एडमिशन लेने वाले 12 छात्रों ने भी सिर मुंडवाए हुए हैं। ऐसे में अटकलें लगाई जा रही हैं कि प्रदेश के हल्द्वानी के साथ अल्मोड़ा, श्रीनगर और दून मेडिकल कालेज में भी रैगिंग हुई है। दरअसल चिकित्सा विश्वविद्यालय की प्रवेश काउंसलिंग के दौरान करीब 30 छात्र-छात्राओं ने अल्मोड़ा, श्रीनगर व दून मेडिकल कालेज में प्रवेश ले लिया था। बाद में इन विद्यार्थियों ने हल्द्वानी में सीटें रिक्त होने पर यहां प्रवेश ले लिया। इसमें करीब 12 छात्र हैं। इन छात्रों के बाल छोटे हैं। ऐसे में दूसरे कालेजों में भी इस तरह से बाल मुंडवाने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। फिलहाल इस मामले में कोई भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं हैं। राजकीय मेडिकल कालेज के प्राचार्य प्रो. अरुण जोशी ने बताया कि दूसरे कालेजों से प्रवेश को आए छात्रों के बाल पहले से ही छोटे किए हुए हैं। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि दूसरे मेडिकल कॉलेजों से हल्द्वानी आने वाले आखिर सभी बच्चों के बाल क्यों छोटे हो रखे हैं। आगे पढ़िए
रैगिंग का यह पूरा प्रकरण राजकीय मेडिकल कालेज हल्द्वानी से शुरु हुआ था। यहां चार मार्च को एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें 27 छात्रों के सिर मुंडवाए हुए थे। ये छात्र सिर नीचे कर परिसर में चल रहे हैं। इसके बाद मामला सुर्खियों में है। हाई कोर्ट के संज्ञान के बाद कमिश्नर व डीआइजी ने 14 मार्च को जांच की। इसमें रैगिंग की पुष्टि हुई है। अब 121 विद्यार्थियों पर पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है। वहीं देहरादून के एसजीआरआर मेडिकल कालेज में भी रैगिंग का मामला सामने आया था। यहां सीनियर छात्रों को फर्स्ट ईयर के छात्र की रैगिंग करना महंगा पड़ गया। रैगिंग के मामले में एंटी रैगिंग कमेटी ने पांच छात्रों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है। साथ ही उन पर जुर्माना भी लगाया गया है। मेडिकल कॉलेज की एंटी रैगिंग कमेटी व अनुशासन कमेटी ने आरोपित सीनियर छात्रों पर सख्त कार्यवाही की है और 5 छात्रों पर 25 हजार से 50 हजार का जुर्माना भी लगाया गया है। वहीं उन्हें 1 से 3 महीने के लिए कॉलेज से निलंबित भी कर दिया गया है। अगर आप भी कॉलेज में जाने की तैयारी कर रहे हैं तो एक बात हमेशा ध्यान में रखिए कि आपको कोई भी किसी कार्य को करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता है। अगर कोई आपकी इच्छा के विरुद्ध आपको जबरदस्ती कुछ करने के लिए मजबूर करता है, तो चुप मत रहिए, तुरंत अपने कॉलेज प्रशासन को अपने साथ हुए व्यवहार की शिकायत कीजिए। हर कॉलेज के परिसर में एक एंटी-रैगिंग स्क्वाड जरूर होता है, जो गलत ढंग से छात्रों के साथ की जाने वाली रैगिंग पर नजर रखने और दोषियों के खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई करता है। ऐसी स्थिति में आप कॉलेज प्रशासन द्वारा स्थापित किए गए हेल्पलाइन नंबरों पर भी मदद के लिए संपर्क कर सकते हैं। रैगिंग से बचने के कुछ तरीके भी हैं। आप कॉलेज के शिक्षकों या प्रशासनिक अधिकारियों को घटना के बारे में सूचित करके मदद मांगें। रैगिंग होने पर अपने अभिभावकों को सूचित करें और कॉलेज में शिकायत करें।