Uttarakhand में मजबूत भू-कानून यानी Uttarakhand land law लागू करने की तैयारी हो रही है। जानिए इस कानून की खास बातें क्या क्या हो सकती हैं।
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कोमल नेगी
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Image: Preparation to implement land law in Uttarakhand
देहरादून: उत्तराखंड में मजबूत भू-कानून की जरूरत महसूस की जा रही है। ऐसा न हुआ तो आर्थिक रूप से कमजोर स्थानीय लोग बेबस और लाचार होकर अपनी जमीनों को बाहरी लोगों के हाथ में जाते हुए देखते रहेंगे।
Preparation to implement land law in Uttarakhand
राज्य सरकार इस मसले को लेकर गंभीर है। जल्द ही पर्वतीय इलाकों में भूमि की बिक्री और खरीद को नियंत्रित करने के लिए हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर एक कड़ा कानून लागू होने की संभावना है। पिछले साल राज्य में भूमि कानूनों में संशोधन पर सुझावों के लिए एक कमेटी गठित की गई थी। जो अगले 10 दिन में अपनी सिफारिशें राज्य सरकार को सौंप सकती है। समिति के अध्यक्ष और राज्य के पूर्व मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने कहा कि हमने जिलाधिकारियों से उनके क्षेत्रों में भूमि की खरीद-फरोख्त के बारे में रिपोर्ट मांगी थी। उम्मीद है कि समिति राज्य सरकार को सप्ताह भर या 10 दिन में अपनी सिफारिशें सौंप देगी।
ज्यादातर जानकार हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर ज्यादा कड़े कानून के पक्ष में हैं, ताकि पर्वतीय क्षेत्रों में भूमि की खरीद-फरोख्त को नियंत्रित किया जा सके। पूर्व मुख्य सचिव ने बताया कि पूर्व में राज्य में भूमि खरीदने और बेचने पर कुछ प्रतिबंध लगाए गए थे, लेकिन 2018 में इन्हें बिल्कुल समाप्त कर दिया गया। समिति के सदस्य अजेंद्र अजय के मुताबिक ऐसे भी मामले सामने आए हैं, जिनमें जमीन मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए खरीदी गयी, लेकिन बाद में उस पर होटल बना दिया गया। अब जिलाधिकारियों से यह सूचना देने को कहा गया है कि किस उद्देश्य के लिए जमीन खरीदी गयी और उसका उपयोग कैसे किया गया। पूर्व मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने कहा कि अभी जिलाधिकारियों की रिपोर्ट का अध्ययन होना और सिफारिशें तैयार करना बाकी है, लेकिन हमारा मत यह है कि भूमि की बिक्री और खरीद बेतरतीब तरीके से नहीं होनी चाहिए। देखना है कि आगे Uttarakhand Land Law को लेकर क्या होता है।