उत्तराखंड: प्रताड़ना से तंग आकर विवाहिता ने की खुदकुशी, दो मासूम बच्चे अब किसे कहेंगे मां?

Rudrapur में 32 साल की Chandra Joshi ने suicide कर दिया। उन्होंने परिवार को मैसेज भेजे हैं और ससुराल वालों पर प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं
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haldwani chandra joshi suicide : Chandra Joshi commits suicide in Rudrapur
Image: Chandra Joshi commits suicide in Rudrapur

हल्द्वानी: उत्तराखंड के यूएसनगर के रुद्रपुर से एक बुरी खबर सामने आ रही है।

Chandra Joshi commits suicide in Rudrapur

ससुराल वालों से लगातार प्रताड़ित होने के बाद और पारिवारिक विवाद के बाद लोक विहार कालोनी निवासी महिला ने जहर का सेवन कर लिया है। वह मरने से कुछ दिनों पहले तक अपने मायके वालों को बोलती रही कि उसके ससुराल वाले उसको बहुत तंग कर रहे हैं। मगर उसके मायके वाले लगातार उसको यही समझाते रहे कि घर में छोटी-मोटी लड़ाई तो होती रहती है। मगर पीड़िता प्रताड़ना सह न सकी और हिम्मत हार कर उसने जहर का सेवन कर लिया। मरने से पहले उसने अपने मायके वालों को व्हाट्सएप करके वीडियो और ऑडियो के जरिए अपनी हालत के बारे में बताया और यह भी बताया कि उसके ससुराल वाले उसको किस हद तक मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं और उसके बाद उसने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। उसे गंभीर हालत में श्रीराम मूर्ति अस्पताल में रेफर किया गया था जहां दो दिन तक वह जिंदगी और मौत के बीच झूलती रही। दो दिन बाद उसकी मौत हो गई। बाद में बरेली पुलिस ने पोस्टमार्टम कराकर शव स्वजनों के सुपुर्द कर दिया। जहां सोमवार को रानीबाग हल्द्वानी में उनका अंतिम संस्कार किया गया। मृतका के दो छोटे-छोटे बच्चे भी हैं जिनके सिर पर से मां का साया हमेशा हमेशा के लिए उठ चुका है। उनका बड़ा पुत्र 10 साल का और छोटी बेटी पांच साल की है। हादसे के बाद से ही मृतका के मायके में कोहराम मच गया है।

आरटीओ रोड, हल्द्वानी निवासी 32 वर्षीय चंद्रा जोशी का विवाह रामपुर रोड स्थित लोक विहार निवासी और पेयजल निगम में सहायक अभियंता पद पर तैनात युवक से 2010 में हुआ था। उनके दो बच्चे हैं। जिसमें बड़ा पुत्र 10 साल का और छोटी बेटी पांच साल की है। बताया जा रहा है कि 2 साल से उसके ससुराल वाले उसको प्रताड़ित कर रहे थे। 23 अप्रैल की सुबह 11 बजे के करीब चंद्रा ने पारिवारिक विवाद के चलते विषाक्त पदार्थ खा लिया। हालत बिगड़ने पर स्वजनों ने उसे रुद्रपुर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां से उसे श्रीराम मूर्ति अस्पताल बरेली रेफर कर दिया गया था। रविवार को अपराह्न 2:30 बजे उसका निधन हो गया। पोस्टमार्टम कराने के बाद पुलिस ने शव स्वजनों के सुपुर्द कर दिया था। मृतका चंद्रा के पिता हरीश जोशी ने बताया कि घटना से पहले उसने अपने भाई को वाट्सएप के माध्यम से वाइस व वीडियो मैसेज भेजे थे। जिसमें वह परेशान हो चुकी हूं, अब नहीं सह सकती कह रही है। बेटी को खो चुके पिता ने बताया कि वह 21 अप्रैल को पुत्र के साथ पुत्री के ससुराल पहुंचे थे जहां परिवार को समझाकर 22 अप्रैल को वापस लौटे। अगले ही दिन यह घटना हो गई। सोमवार को रानीबाग घाट पर बेटी की अंत्येष्टि के समय पिता फफक कर रो पड़े। हरीश जोशी प्रवक्ता पद से सेवानिवृत्त हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने बच्चों को सदैव अच्छी शिक्षा ही दी है। कई बार उनकी बेटी शिकायत करती कि सास व ननद परेशान करते हैं। इस पर वह कह देते कि छोटी-छोटी बातें परिवार में अक्सर हो जाती हैं। परिवार की बेहतरी के लिए उसे नजरंदाज कर दिया कर। मगर बेटी को यह नहीं सिखाया कि कभी किसी चीज की अति हो जाए तो उसका विरोध करना जरूरी हो जाता है। अगर वे अपनी बेटी को विरोध करना सिखाते तो आज शायद चंद्रा जिंदा होती।